महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने राज्य में ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2026’ को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इन नए नियमों के तहत अब ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी ऐप आधारित यात्री परिवहन सेवाओं को एक समान नियामक व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। अधिकारियों द्वारा गुरुवार को दी गई जानकारी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के अधिकार और किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस अनिवार्य, किराये का दायरा तय
बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, महाराष्ट्र में काम करने वाली हर एग्रीगेटर कंपनी के लिए संबंधित प्राधिकरण से लाइसेंस और एक विशिष्ट लाइसेंस पहचान संख्या (ULIN) लेना अनिवार्य होगा। पुराने नियमों के तहत जारी लाइसेंस नए नियम लागू होने के बाद केवल 60 दिनों तक या नए आवेदन पर फैसला होने तक ही वैध रहेंगे।
किराये को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा तय किराये को ही ‘आधार किराया’ माना जाएगा। एग्रीगेटर कंपनियां इस आधार किराये से अधिकतम 25 फीसदी कम या अधिकतम डेढ़ गुना (1.5 गुना) तक बढ़ाकर ही किराया वसूल सकेंगी। इससे कंपनियों की मनमानी सर्ज प्राइसिंग पर रोक लगेगी।
चालकों के हितों की रक्षा और 12 घंटे की सीमा
नए नियमों में चालकों (ड्राइवर्स) के आर्थिक हितों का विशेष ध्यान रखा गया है:
- कंपनियों के लिए कुल किराये का कम से कम 80 फीसदी हिस्सा चालकों को देना अनिवार्य होगा।
- सुविधा शुल्क (पूलिंग या अन्य विशेष व्यवस्था) के तहत आधार किराये का कम से कम 95 फीसदी हिस्सा चालकों के खाते में जाएगा।
- चालक एक से अधिक एग्रीगेटर कंपनियों के साथ काम करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
- कोई भी चालक लगातार 12 घंटे से अधिक समय तक वाहन नहीं चला सकेगा और उनके लिए अनिवार्य प्रशिक्षण लेना आवश्यक होगा।
नियम तोड़ने पर 1 करोड़ तक का जुर्माना
सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। बार-बार नियम तोड़ने, यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने या किराये में गड़बड़ी करने पर एग्रीगेटर कंपनियों का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही, दोषियों पर 1 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है।
कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर चलने वाले वाहनों के पास वैध पंजीकरण, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, पीयूसी (PUC) और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं हों। साथ ही, 9 साल से पुराने टैक्सी-ऑटो और 12 साल से पुरानी बसों को प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
सुरक्षा के आधुनिक मानक और महिलाओं के लिए विशेष विकल्प
यात्रियों की सुरक्षा के लिए ऐप में 24 घंटे ग्राहक सहायता, वास्तविक समय (रियल-टाइम) की जीपीएस ट्रैकिंग, यात्रा की लाइव जानकारी साझा करने की सुविधा और चालकों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (नशे की हालत में ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई) नीति लागू होगी। बुकिंग ऐप का मराठी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध होना अनिवार्य है।
इसके अलावा, राइड शेयरिंग (पूलिंग) चुनने वाली महिला यात्रियों को सुरक्षा के लिहाज से केवल महिला सह-यात्रियों के साथ ही यात्रा करने का विकल्प (विंडो) मिलेगा। निजी कार पूलिंग को भी कानूनी मान्यता दी गई है, लेकिन इसके जरिए व्यावसायिक लाभ कमाने की अनुमति नहीं होगी; केवल यात्रा का वास्तविक खर्च साझा किया जा सकेगा।
परिवहन मंत्री का बयान: आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि इन नियमों के आने से ऐप आधारित परिवहन सेवाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगी। इससे जहां एक तरफ चालकों के हितों की रक्षा होगी और किराया नियंत्रित रहेगा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए और सुरक्षित अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने इसे महाराष्ट्र में एक सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

