ममता बनर्जी के काफिले पर कथित हमले और चोटों को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष का तीखा हमला
कोलकाता:
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) से अनुमति मिलने के बाद इलाज के लिए विदेश जाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, इस घटनाक्रम के सामने आते ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया जुबानी तीर शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के तय समयसीमा (21 दिन) के भीतर भारत लौटने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें आशंका है कि विदेश में इलाज को न्याय की प्रक्रिया से बचने के एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऋतब्रत बनर्जी के बयानों के प्रमुख बिंदु
- 21 दिनों में वापसी पर संदेह: नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभिषेक बनर्जी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 21 दिनों की अवधि के भीतर वापस आते हैं या नहीं।
- ममता बनर्जी के काफिले पर हमले का मुद्दा: पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर कथित हमले के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं, लेकिन यह साफ होना जरूरी है कि घटना के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने स्थानीय पुलिस को इस बाबत लिखित या आधिकारिक जानकारी दी थी या नहीं।
- चोटों की लगातार चर्चा पर तंज: ममता बनर्जी को लगी चोटों पर टिप्पणी करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि देश में 1952 से चुनाव होते आए हैं, लेकिन लगातार तीन महीनों तक किसी नेता की चोटों की इतनी राजनीतिक चर्चा उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया सियासी घमासान
| मुद्दा | विपक्ष (ऋतब्रत बनर्जी) का रुख | आगे की स्थिति |
|---|---|---|
| अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा | न्याय और जांच से बचने का संशय जताया; 21 दिन में वापसी की शर्त पर नजर। | यात्रा के कारण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की शर्तें 21 दिनों की अवधि पूरी होने पर स्पष्ट होंगी। |
| ममता बनर्जी पर हमला व चोटें | पुलिस शिकायत और मेडिकल दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। | मामले में जांच और राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने के आसार। |
पश्चिम बंगाल में 2026 के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा और ममता बनर्जी से जुड़े मुद्दों ने सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमों के बीच तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है।

