तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने का लक्ष्य; बिहार के सियासी घटनाक्रम का जिक्र कर विपक्ष को घेरा
छत्रपति संभाजीनगर: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा सियासी दांव चला है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ओवैसी ने गुरुवार को कहा कि इस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह राज्य के अन्य समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, यह गठबंधन किन दलों के साथ होगा, इस पर उन्होंने फिलहाल किसी पार्टी का नाम उजागर नहीं किया है।
छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की रणनीति के साथ-साथ बिहार में अपनी पार्टी के साथ घटे पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने विपक्षी दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि बिहार में जब एआईएमआईएम के चार विधायक पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए थे, तब उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत केवल छह सीटों की मांग रखी थी। इसके बावजूद कथित धर्मनिरपेक्ष और विपक्षी दलों में से किसी ने भी उनकी पार्टी के पक्ष में आवाज नहीं उठाई और उन्हें नजरअंदाज किया गया।
ओवैसी ने आगे कहा कि तमाम उपेक्षा और राजनीतिक झटकों के बावजूद उनकी पार्टी ने जनता के बीच जाकर दोबारा संघर्ष किया और आम जनता के मजबूत समर्थन की बदौलत पांच विधानसभा सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक ताने-बाने को मजबूत करने और भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्षी दलों को व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी के इस खुले प्रस्ताव के बाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी खेमों में नई सियासी हलचल और समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

