हिंदू राष्ट्र को मजबूत करने के लिए आर्थिक एकजुटता का आह्वान, 2047 को लेकर विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
नवी मुंबई: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने नवी मुंबई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिंदुओं से अपनी आर्थिक गतिविधियों को लेकर बड़ा आह्वान किया है। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की कि वे खरीदारी करते समय केवल हिंदू दुकानदारों को ही प्राथमिकता दें और व्यापारिक लेन-देन भी मुख्य रूप से आपस में ही करें।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक हिंदू नागरिक को किसी भी प्रकार के व्यापार या रोजमर्रा की खरीदारी से पूर्व यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति हिंदू है या नहीं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वाणिज्यिक लेन-देन में इस प्रकार की सतर्कता और प्राथमिकता समुदाय के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
राणे ने इस आर्थिक रणनीति को ‘हिंदू राष्ट्र’ के निर्माण और उसकी मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हिंदुओं को एकजुट होने की सख्त जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक और राजनीतिक एकता के साथ-साथ आर्थिक व्यवहार में भी पारस्परिक समन्वय और एकजुटता दिखाना समय की मांग है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वामीजी के विचारों का संदर्भ देते हुए आत्मनिर्भरता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए यह आवश्यक है कि समुदाय के भीतर ही पूंजी का प्रवाह बना रहे और जो ग्राहक खरीदारी के लिए आएं, वे भी हिंदू समुदाय से ही जुड़े हों।
संबोधन के अंत में नितेश राणे ने एक विवादास्पद दावा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ विशेष तत्वों का अंतिम लक्ष्य 2047 तक भारत को एक इस्लामी राष्ट्र के रूप में परिवर्तित करना है। हालांकि, उनका यह बयान पूरी तरह से उनका अपना व्यक्तिगत आरोप है, जिसको लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

