सीधी उड़ान, मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार के बाद कूटनीतिक संबंधों में नरमी; विशेषज्ञों ने दी संतुलित विदेश नीति की सलाह
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश लेकर चीन दौरे पर गए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल अपनी अहम यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट आए हैं। इस दौरे के दौरान भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (SRs) के बीच लंबित सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में सार्थक और गहन चर्चा हुई। बातचीत में अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावों और भारत की संवेदनशीलता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
चीन के विदेश मंत्री और विशेष प्रतिनिधि वांग यी ने भी भारतीय समकक्ष के रुख का समर्थन किया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि दोनों देश सीमा विवाद के समाधान के लिए 2005 में बनी ऐतिहासिक सहमति के सिद्धांतों पर आगे बढ़ने को तैयार हैं। इससे पूर्व दोनों देशों ने सीधी उड़ान सेवाओं को मंजूरी देने के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन पारंपरिक दर्रों से सीमा व्यापार की प्रक्रिया को पुनः सक्रिय किया है।
वैश्विक कूटनीति और अमेरिका-रूस संतुलन पर विशेषज्ञों की राय भारत और चीन के सुधरते रिश्तों पर अमेरिका सहित प्रमुख वैश्विक शक्तियों की करीबी नजर बनी हुई है। पूर्व विदेश सचिव शशांक के अनुसार, भारत को अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक समीकरणों में तेजी से बदलाव आ रहे हैं, ऐसे में भारत को अपने पुराने और विश्वसनीय सामरिक साझेदार रूस के साथ संबंधों की गहराई को बरकरार रखना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत को बहुपक्षीय कूटनीति अपनाते हुए ब्रिक्स (BRICS) जैसे महत्वपूर्ण मंचों को और अधिक मजबूती देनी चाहिए, जिससे वैश्विक स्तर पर रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित की जा सके।

