महानदी और हीराकुंड जलाशय का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर; 10 जिलों में स्कूल बंद, 30 हजार लोग राहत शिविरों में शिफ्ट
भुवनेश्वर:
ओडिशा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति बेहद विकराल हो गई है। राज्य के करीब छह उत्तरी जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं और दो लाख से अधिक आबादी इसकी चपेट में आ गई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बताया कि सरकार स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी स्थिति की समीक्षा करते हुए लोगों से न घबराने और प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
क्योंझर में 3 मौतें, तीन जिलों में IAS अफसर तैनात
- 3 लोगों की मौत: आपदा में हुई तीनों मौतें क्योंझर जिले से दर्ज की गई हैं। इनमें ड्यूटी के दौरान करंट लगने से जान गंवाने वाले फायर सर्विस कर्मी चंदन पटनायक, दीवार गिरने से एक बुजुर्ग और पानी में डूबने से एक बच्चे की मौत शामिल है।
- सबसे प्रभावित जिले: बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, संबलपुर और ढेंकानाल बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हैं।
- सीनियर अफसरों की तैनाती: राज्य सरकार ने बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों में राहत व बचाव कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को मौके पर तैनात किया है।
- 10 जिलों में स्कूल बंद: गंभीर हालात को देखते हुए 10 प्रभावित जिलों में सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।
266 गांव जलमग्न, 7,901 हेक्टेयर फसल तबाह
राज्य के 44 ब्लॉकों के 266 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, 761 मकानों को नुकसान पहुंचा है और 7,901 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।
प्रशासन द्वारा निचले इलाकों से करीब 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां उनके लिए पके हुए भोजन और दवाओं का प्रबंध किया गया है। एनडीआरएफ (NDRF), ओड्राफ (ODRAF) और फायर सर्विस की टीमें दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
महानदी और हीराकुंड जलाशय का बढ़ता जलस्तर बना नई चुनौती
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश) में हो रही बारिश के कारण महानदी प्रणाली में पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है:
- हीराकुंड डैम: जलाशय का जलस्तर 616 फुट पहुंच गया है (अधिकतम क्षमता 630 फुट है)। जलस्तर 620 फुट पार करते ही अतिरिक्त स्लूइस गेट खोले जा सकते हैं।
- नराज में जलप्रवाह: कटक के पास नराज क्षेत्र में गुरुवार तक जलप्रवाह 9 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की संभावना है, जिससे कटक और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में और अधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

