नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2026
भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए खाद्य संकट और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे अफ्रीकी देशों—मोजाम्बिक, मलावी और बुर्किना फासो—की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि मानवीय सहायता के रूप में इन देशों को भारी मात्रा में चावल और अन्य राहत सामग्री भेजी गई है।
सहायता का विवरण:
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अलग-अलग संकटों से जूझ रहे इन देशों को निम्नलिखित मदद पहुंचाई गई है:
- मलावी: सूखे की मार झेल रहे इस देश को 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा गया है। (यहाँ अल-नीनो के प्रभाव के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है)।
- बुर्किना फासो: आंतरिक विस्थापन और खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल की खेप भेजी गई है।
- मोजाम्बिक: बाढ़ प्रभावित समुदायों के लिए 500 मीट्रिक टन चावल और आवश्यक राहत सामग्री भेजी गई है।
“भरोसेमंद भागीदार के रूप में भारत”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया (X) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस सहायता का मुख्य उद्देश्य कमजोर समुदायों और विस्थापित लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर दिया कि यह कदम आपदा राहत भागीदार के रूप में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अफ्रीका में भारत की ‘दोहरी रणनीति’
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह पहल केवल तात्कालिक मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक सोच भी है:
- मानवीय दृष्टिकोण: तत्काल संकट (बाढ़, सूखा, राजनीतिक अस्थिरता) के समय भोजन और दवाएं उपलब्ध कराना।
- दीर्घकालिक सहयोग: अफ्रीका में दुनिया के 30% महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार है। भारत अब जाम्बिया, जिम्बाब्वे और तंजानिया जैसे देशों के साथ तकनीक, प्रशिक्षण और साझेदारी के जरिए भविष्य के संसाधनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
चुनौतियां और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
अफ्रीका के कई देश इस समय इस्लामी सशस्त्र समूहों की हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता (जैसे बुर्किना फासो में 2025 का तख्तापलट) का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत की सक्रियता उसे चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच एक ‘भरोसेमंद विकल्प’ के रूप में स्थापित करती है।

