कैबिनेट सचिव को लिखे पत्रों में नहीं था कोई नीतिगत विवाद, विपक्ष के आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अपने शीर्ष नेतृत्व के भीतर किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद या असहमति की खबरों का एक बार फिर दृढ़ता से खंडन किया है। आयोग ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि संस्था की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है और सभी नीतिगत तथा प्रशासनिक निर्णय आपसी तालमेल और सर्वसम्मति के आधार पर ही लिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने कैबिनेट सचिव को दो चुनाव आयुक्तों द्वारा लिखे गए पत्रों को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने रेखांकित किया कि इन पत्रों में न तो किसी नीतिगत विषय को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया था और न ही आयोग के आईटी विभाग की कार्यप्रणाली से संबंधित कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी। आयोग के अनुसार, वह पत्राचार केवल प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कामकाज और जिम्मेदारियों से संबंधित था।
विगत कुछ समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निर्वाचन आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच अनबन और टकराव की खबरें लगातार प्रसारित की जा रही थीं। इन अपुष्ट खबरों और अटकलों का हवाला देते हुए विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तक की राजनीतिक मांग कर डाली थी।
आयोग ने विपक्ष द्वारा लगाए गए इन सभी राजनीतिक आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। आयोग ने कहा कि संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से सामान्य प्रशासनिक पत्राचार को आंतरिक कलह के रूप में पेश किया जा रहा है। आयोग के भीतर सभी सदस्य चुनाव प्रबंधन और चुनावी सुधारों को लेकर पूरी तरह एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।
आधिकारिक बयान के अंत में आयोग ने यह दोहराया कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारू बनाए रखने के लिए उसका हर फैसला सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर आधारित रहता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर फैसलों में कोई गतिरोध नहीं रहा है और संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और सहमति के साथ निरंतर किया जा रहा है।

