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Sunday, March 29, 2026

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निलंबित नब दास के निजी सुरक्षा अधिकारी, जांच की निगरानी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे

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ओडिशा पुलिस ने बुधवार को दिवंगत मंत्री नब किशोर दास के निजी सुरक्षा अधिकारी को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि ब्रजराजनगर थाने के प्रभारी निरीक्षक और गांधी चौक पुलिस चौकी के प्रभारी का तबादला कर दिया गया है। मंत्री नब दास की हत्या के बाद राज्य सरकार ने मंगलवार को झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक और ब्रजराजनगर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया था।

29 जनवरी की शाम को झारसुगुड़ा जिले के ब्रजराजनगर में एक पुलिसकर्मी ने 60 वर्षीय दास को गोली मार दी थी। इसके कुछ घंटों बाद मंत्री की मौत हो गई थी। नब दास यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। ओडिशा पुलिस ने सहायक उप-निरीक्षक गोपाल दास को मंत्री को गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सोमवार को गोपाल दास को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

घटना के समय मौके पर थे सुरक्षा अधिकारी
पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिवंगत मंत्री नब किशोर दास के निजी सुरक्षा अधिकारी मित्रभानु देव को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मी ने जब दास पर गोलियां चलाईं, तब देव ड्यूटी पर थे। सुरक्षा अधिकारी ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही वह वीवीआईपी दौरे के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने में भी विफल रहे। बता दें, दास के निजी सुरक्षा अधिकारी से राज्य पुलिस की अपराध शाखा की टीम ने मंगलवार को पूछताछ की थी।

हत्या मामले की जांच की निगरानी करेंगे सेवानिवृत्त न्यायाधीश
वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि उड़ीसा हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश जेपी दास राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास की हत्या की जांच की निगरानी करेंगे। गृह विभाग ने हाईकोर्ट से पुलिस की अपराध शाखा द्वारा की जा रही जांच की निगरानी के लिए एक पूर्व न्यायाधीश का नाम देने का अनुरोध किया था।

गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर प्रशासन ने हाईकोर्ट से जांच में पारदर्शिता बनाए रखने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि वह जांच की निगरानी के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेपी दास को नियुक्त करे।

राज्य सरकार ने मंत्री नब दास की हत्या के बाद मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी थी। वहीं, विपक्षी भाजपा ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की थी और दावा किया था कि ओडिशा पुलिस दिवंगत मंत्री को न्याय नहीं दिला सकती, क्योंकि एक पुलिसकर्मी इस मामले में मुख्य आरोपी है। वहीं, कांग्रेस ने अदालत की निगरानी वाले विशेष जांच दल से मामले की जांच कराने की मांग की है।

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