रिएक्टिन प्लस टैबलेट से जुड़ी अनियमितताओं पर FDA की सख्त कार्रवाई; कंपनी ने फैसले को बताया निराशाजनक
पुणे: महाराष्ट्र के दवा विनिर्माण और वितरण क्षेत्र में एक बड़ी नियामक कार्रवाई सामने आई है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रमुख फार्मास्यूटिकल कंपनी ‘सिप्ला’ के पुणे स्थित वाडकी में मौजूद कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) गोदाम के थोक दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। नियामक संस्था ने यह सख्त विधिक कदम भंडारण और वितरण से जुड़े औषधि मानकों व निर्धारित नियमों के कथित उल्लंघन के चलते उठाया है। दूसरी तरफ, दवा कंपनी सिप्ला ने प्रशासनिक आदेश पर असंतोष व्यक्त करते हुए इसे बेहद निराशाजनक करार दिया है और स्पष्ट किया है कि उनके परिसर में सभी वैधानिक गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया जाता है।
नियामक अधिकारियों के अनुसार, एफडीए द्वारा की गई यह नई कार्रवाई पूर्व में एक अगस्त को शुरू की गई जांच प्रक्रिया की निरंतरता में सामने आई है। इससे पहले 27 अगस्त को एफडीए के विशेष जांच दल ने वाडकी स्थित उक्त गोदाम का औचक निरीक्षण किया था। इस जांच के दौरान दर्द निवारक ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट से संबंधित परिचालन में कई गंभीर अनियमितताएं और विसंगतियां पाई गई थीं।
जांच रिपोर्ट में दवा की पैकेजिंग, भंडारण के तापमान और मानकों, आधिकारिक दस्तावेजों के संधारण तथा बाजार से दवा वापस मंगाने (रिकॉल प्रोसेस) की निर्धारित प्रक्रिया में स्पष्ट कमियों को चिन्हित किया गया था। उल्लेखनीय है कि रिएक्टिन प्लस एक ‘शेड्यूल एच’ श्रेणी की प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसकी बिक्री और वितरण के लिए कड़े नियामक प्रावधान तय हैं। एफडीए के अनुसार, दवा की पैकेजिंग पर ऐसे चिकित्सीय दावे मुद्रित किए गए थे जो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमों के निर्धारित प्रारूप और स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
गोदाम में सामने आई इन तकनीकी खामियों के बाद मामला अदालत की चौखट तक भी पहुंचा था। न्यायिक निर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत एफडीए ने अपनी पूर्व की प्रारंभिक कार्रवाई को वापस लेते हुए नए सिरे से विधिक प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी करने और जवाब की समीक्षा के बाद अब गोदाम के लाइसेंस को पूर्णतः निरस्त करने का अंतिम आदेश पारित कर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध वैधानिक अपीलीय मंचों पर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।

