यूपी के चंदौली से 3 हजार किमी दूर डिब्रूगढ़ अटैचमेंट पर विवाद, बल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने की पुष्टि
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (CRPF) के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच का विवाद खुलकर सामने आ गया है। बल के एक कमांडेंट ने विजिलेंस शाखा के डीआईजी के खिलाफ सीधे भारत की राष्ट्रपति से लिखित शिकायत की है। शिकायत में कमांडेंट ने अपने मौलिक अधिकारों के गंभीर उल्लंघन, अनधिकृत अनुशासनात्मक कार्रवाई और आधिकारिक अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। सीआरपीएफ मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस शिकायत की पुष्टि की है।
3 हजार किलोमीटर दूर अटैच करने पर उठा विवाद उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित ग्रुप सेंटर में तैनात कमांडेंट पंकज पीटर शाह को डीआईजी विजिलेंस द्वारा असम के डिब्रूगढ़ में जांच अधिकारी (आईओ) के कार्यालय से अटैच कर दिया गया था। कमांडेंट का आरोप है कि चंदौली से लगभग तीन हजार किलोमीटर दूर जबरन अटैचमेंट करने का निर्णय द्वेषपूर्ण और अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर लिया गया है।
कार्यालय में ही रोके रखने के निर्देश का दावा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डीआईजी विजिलेंस संजय कुमार सिंह ने डिब्रूगढ़ स्थित डीआईजी प्रभाकर त्रिपाठी को निर्देश दिए थे कि कमांडेंट पीटर शाह को उनके दफ्तर से संबद्ध किया जा रहा है और वे हर समय कार्यालय परिसर में ही मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि कमांडेंट की प्रत्येक गतिविधि सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही हो।
आरोप पत्र और गवाहों का उल्लेख कमांडेंट पंकज पीटर शाह ने राष्ट्रपति को प्रेषित अपने विस्तृत पत्र में कहा है कि डीआईजी सीआर/विजिलेंस द्वारा 10 मार्च 2025 को उन्हें आरोपों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था। इस आरोप पत्र को 123 दस्तावेजी साक्ष्यों और 19 गवाहों के बयानों पर आधारित बताया गया था। कमांडेंट ने इस पूरी विभागीय प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण और अधिकारों का अनुचित इस्तेमाल बताते हुए मामले में शीर्ष स्तर से न्यायसंगत हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

