चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के बीच डीएमके (DMK) ने अपनी विधायक दल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए हैं। पार्टी ने जहाँ एक ओर अपने भविष्य की रणनीति स्पष्ट की है, वहीं दूसरी ओर अपनी पुरानी सहयोगी रही कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है।
कांग्रेस पर ‘विश्वासघात’ का आरोप
डीएमके ने अपने प्रस्ताव में कांग्रेस पर खुलकर हमला बोलते हुए उसे ‘विश्वासघाती’ करार दिया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील गठबंधन से दूरी बनाकर अपना पुराना राजनीतिक चरित्र उजागर किया है। डीएमके ने याद दिलाया कि उनके गठबंधन के कारण ही कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें मिली थीं, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने ‘दूसरे मोर्चे’ (विजय की टीवीके) की ओर बढ़कर गठबंधन कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के जनादेश का अपमान किया है।
एमके स्टालिन को मिले असीमित अधिकार
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन के पक्ष में रहा। वर्तमान की अस्थिर राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए स्टालिन को तुरंत और जरूरी राजनीतिक फैसले लेने का पूरा अधिकार दे दिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु की जनता अभी दोबारा चुनाव के लिए तैयार नहीं है और राज्य को एक स्थिर सरकार की जरूरत है।
जनता और कार्यकर्ताओं का आभार
डीएमके ने एक अन्य प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु की जनता और उन गठबंधन सहयोगियों का धन्यवाद किया, जो अब भी उनके साथ खड़े हैं। पार्टी ने कठिन हालात में मिले समर्थन को ‘लोकतांत्रिक ताकतों की जीत’ बताया। साथ ही, यह संकल्प लिया गया कि द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा के खिलाफ काम करने वाली ताकतों को राज्य में किसी भी कीमत पर जगह नहीं दी जाएगी।
स्थिर सरकार की मांग
डीएमके के इन कड़े तेवरों से साफ है कि वे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता नहीं चाहते। स्टालिन को मिले अधिकारों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डीएमके कोई बड़ा सियासी उलटफेर कर पाएगी या राज्य की सत्ता की बागडोर थलापति विजय की पार्टी ‘टीवीके’ के हाथों में जाएगी।

