अब गैर-फार्मासिस्ट के भरोसे नहीं चलेंगे गोदाम; ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 64 में संशोधन की तैयारी
नई दिल्ली: देश भर में थोक दवा कारोबार (होलसेल मेडिसिन डिस्ट्रीब्यूशन) के संचालन ढांचे को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा नीतिगत कदम उठाने की दिशा में अग्रसर है। अब खुदरा दवा दुकानों (रिटेल फार्मेसी) की तर्ज पर थोक दवा प्रतिष्ठानों, वितरण केंद्रों और बड़े गोदामों के संचालन के लिए भी फार्मेसी संकाय में डिग्री अथवा डिप्लोमा धारक पंजीकृत फार्मासिस्ट को ही वैधानिक तौर पर ‘कम्पीटेंट पर्सन’ (जिम्मेदार व्यक्ति) बनाना अनिवार्य किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत शीर्ष तकनीकी सलाहकार संस्था ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ (डीटीएबी) ने मौजूदा कानूनी प्रावधानों में संशोधन की आधिकारिक सिफारिश कर दी है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 64 के तहत थोक दवा लाइसेंस (विशेष तौर पर फॉर्म 20-बी और फॉर्म 21-बी) हासिल करने और व्यवसाय के संचालन के लिए परिसर में केवल एक ‘कम्पीटेंट पर्सन’ का होना पर्याप्त माना जाता है। मौजूदा नियमों में इस जिम्मेदारी के लिए तीन अलग-अलग विकल्प मान्य हैं—पहला पंजीकृत फार्मासिस्ट, दूसरा किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 10वीं पास व्यक्ति जिसे दवा बिक्री का कम से कम चार वर्ष का व्यावहारिक अनुभव हो, और तीसरा किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री धारक व्यक्ति जिसे संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम एक वर्ष का अनुभव प्राप्त हो।
डीटीएबी की नवीनतम सिफारिशों के तहत गैर-फार्मासिस्टों को दी गई इस वैधानिक छूट को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नियामक संस्था का तर्क है कि आधुनिक औषधियों के वैज्ञानिक भंडारण, सटीक तापमान नियंत्रण (कोल्ड चेन मेंटेनेंस), गुणवत्ता मानकों के अनुपालन और समय-सीमा समाप्त (एक्सपायरी) दवाओं के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पेशेवर का होना अनिवार्य है। यदि स्वास्थ्य मंत्रालय इस सिफारिश को अंतिम रूप देकर गजट अधिसूचना जारी करता है, तो गैर-फार्मासिस्ट अनुभवी कर्मियों के माध्यम से थोक दवा एजेंसियां संचालित कर रहे हजारों व्यवसायियों को अपने प्रतिष्ठानों में अनिवार्य रूप से पंजीकृत फार्मासिस्टों की नियुक्ति करनी होगी। इसके साथ ही थोक लाइसेंस के लिए निर्धारित न्यूनतम परिसर क्षेत्रफल और भौतिक भंडारण के अन्य कड़े नियम पूर्ववत लागू रहेंगे।

