27.2 C
Mumbai
Thursday, July 23, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

कोच्चि: बीडीएस छात्र आत्महत्या मामले में केरल हाईकोर्ट सख्त, पुलिस अधिकारियों पर आरोपी को बचाने का जताया संदेह

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने कन्नूर के एक निजी डेंटल कॉलेज के बीडीएस (BDS) छात्र नितिन राज की कथित आत्महत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मुख्य आरोपी को हिरासत से बचाने में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी (IO) और क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (SP) को 24 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला कन्नूर के अंजराकंडी स्थित निजी डेंटल कॉलेज के अनुसूचित जाति (SC) से आने वाले छात्र नितिन राज की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। नितिन 10 अप्रैल को कॉलेज परिसर की एक इमारत से गिरने के बाद मृत पाए गए थे। आरोप है कि कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. एम. के. राम ने कक्षा में नितिन का मानसिक उत्पीड़न किया और अपमानित किया था।

मामले के मुख्य आरोपी डॉ. राम की अग्रिम जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह से खारिज हो चुकी थीं। इसके बाद उन्हें कर्नाटक से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, गिरफ्तारी के तुरंत बाद सोमवार को विशेष अदालत ने उन्हें यह कहते हुए रिहा करने का आदेश दे दिया कि पुलिस ने आरोपी को ‘गिरफ्तारी के आधार’ (Grounds of Arrest) लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराए थे।

हाईकोर्ट ने जताई गहरी नाराजगी: ‘डीएसपी स्तर का अधिकारी यह गलती कैसे कर सकता है?’

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की पीठ ने कहा कि यह मानना असंभव है कि उप पुलिस अधीक्षक (DySP) रैंक के जांच अधिकारी को यह कानूनी नियम न पता हो कि आरोपी को अदालत में पेश करते समय गिरफ्तारी का आधार देना अनिवार्य होता है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से संदेह पैदा होता है कि आरोपी को बचाने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि राज्य सरकार को आनन-फानन में विशेष जांच दल (SIT) का गठन करना पड़ा।

अदालत ने दिए ये कड़े निर्देश:

  • 24 जुलाई को पेशी: जांच अधिकारी (IO) और जांच की निगरानी कर रहे क्राइम ब्रांच एसपी को 24 जुलाई को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
  • दस्तावेज और हलफनामा: पुलिस को गिरफ्तारी से जुड़ी सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करने के संबंध में हलफनामा पेश करने और निचली अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों की प्रतियां लाने का निर्देश दिया गया है।
  • निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब: हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के न्यायाधीश से भी आरोपी को पेश करते समय जमा किए गए दस्तावेजों और रिहाई के आदेश की कॉपी तुरंत भेजने को कहा है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी की रिहाई से पहले पीड़ित परिवार का पक्ष नहीं सुना गया था।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here