2024 विधानसभा चुनाव परिणामों का दिया हवाला, जाति जनगणना के फैसले का किया स्वागत
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने शिवसेना और एनसीपी के विभाजन को लेकर अपना स्पष्ट फैसला दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित पार्टी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि शीर्ष अदालत भी जनता के जनादेश के अनुरूप ही फैसला सुनाएगी।
सीएम फडणवीस ने कहा, “शिवसेना का मामला अदालत में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला देगा। लेकिन उससे पहले जनता की अदालत है। 2024 के चुनाव में जनता की अदालत ने यह तय कर दिया है कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे की और एनसीपी अजित पवार की है। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी इसी तरह का फैसला देगा।”
पार्टी विभाजन और चुनाव चिह्न की कानूनी जंग जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने शिंदे गुट को मूल शिवसेना और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित किया था। वहीं, जुलाई 2023 में अजित पवार के महायुति सरकार में शामिल होने के बाद एनसीपी का विभाजन हुआ और आयोग ने अजित गुट को ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न सौंपा। चुनाव आयोग के इन फैसलों को उद्धव ठाकरे और शरद पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
जाति जनगणना पर केंद्र के फैसले का स्वागत मुख्यमंत्री ने जनगणना के दूसरे चरण में जातिगत आंकड़े शामिल करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे स्वीकार कर लिया गया है और इसे नियत चरणों के अनुसार पूरा किया जाएगा।

