21 राज्यों ने केंद्र के साथ किए समझौते, कम इस्तेमाल हो रहे रूटों और एयरस्ट्रिप को किया जाएगा विकसित
नई दिल्ली: देश के आम नागरिकों के लिए हवाई सफर को अधिक सुलभ, सुगम और किफायती बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने संशोधित ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत नए रूटों और एयरपोर्ट चयन की आधिकारिक प्रक्रिया मंगलवार से शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी, जिसका प्राथमिक फोकस टियर-2 और टियर-3 के छोटे शहरों तथा दूर-दराज के इलाकों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से सीधे जोड़ना है। इस नए चरण के तहत राज्य सरकारें ऐसे व्यस्त रूटों और अनुपयोगी एयरस्ट्रिप की पहचान करेंगी जहां यात्रियों की आवाजाही की प्रबल संभावनाएं हैं, ताकि संयुक्त प्रयासों से उनका तेजी से कायाकल्प किया जा सके।
उड़ान योजना 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंगलवार को देश के 21 राज्यों ने केंद्र सरकार के साथ औपचारिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि देश भर में मौजूदा करीब 100 ऐसी अप्रयुक्त हवाई पट्टियों को पूर्ण विकसित वाणिज्यिक एयरपोर्ट के रूप में तैयार किया जाएगा, जो वर्तमान में उपयोगहीन पड़ी हैं। इसके साथ ही जो एयरपोर्ट पहले से बने हैं लेकिन वहां उड़ानों की आवृत्ति कम है, उनकी उपयोगिता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने नई रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया कि इस चरण में बुनियादी ढांचे के विकास की गति बढ़ाने के लिए ‘चैलेंज मोड’ दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके तहत निर्माण कार्य शुरू होने के बाद प्रत्येक चिह्नित एयरपोर्ट को अधिकतम 18 महीने के भीतर पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि पहले इस पूरी प्रक्रिया में औसतन तीन वर्ष का समय लगता था। उल्लेखनीय है कि पिछले एक दशक में उड़ान योजना के जरिए 90 से अधिक नए एयरपोर्ट चालू किए गए हैं, जिसकी बदौलत 1.54 करोड़ से अधिक यात्रियों ने किफायती दरों पर सुरक्षित हवाई यात्रा का लाभ उठाया है।

