12,000 प्रकाशवर्ष दूर धूल की परतों में छिपा था आईआरएएस 18293−0941, अंतरराष्ट्रीय दूरबीनों की मदद से हुई पुष्टि
हमारी आकाशगंगा में खगोलविदों ने पहली बार एक ऐसे अत्यंत दुर्लभ माइक्रोब्लेजर की पहचान की है, जिसे एक विशाल ब्लैक होल संचालित कर रहा है। अंतरिक्ष में घटी इस असाधारण खगोलीय घटना में ब्लैक होल अपने नजदीकी साथी विशाल तारे से लगातार भारी मात्रा में गैसीय पदार्थ खींच रहा है। इसके साथ ही, वह अपने दोनों ध्रुवों से अंतरिक्ष में प्लाज्मा के दो अत्यधिक ऊर्जावान और शक्तिशाली जेट फेंक रहा है। इन जेट्स के निकलने की गति भौतिकी में प्रकाश की गति के बेहद करीब आंकी गई है।
पृथ्वी से लगभग 12,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित यह खगोलीय प्रणाली लंबे समय तक घने अंतरिक्षीय गैस और धूल की मोटी परतों के पीछे ओझल रही, जिस कारण इसका पहले पता नहीं चल सका था। स्पेस डेली की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इस विशेष प्रणाली को ‘आईआरएएस 18293−0941’ (IRAS 18293−0941) नाम दिया है।
स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ जाएन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधानकर्ताओं के दल ने यूरोपीय वीएलबीआई नेटवर्क और दक्षिण अफ्रीका की आधुनिक मीरकैट रेडियो वेधशाला समेत दुनिया भर की कई शक्तिशाली रेडियो दूरबीनों के नेटवर्क की मदद से इन शक्तिशाली जेट्स के अस्तित्व और उनकी सटीक दिशा की पुष्टि की है। इस ऐतिहासिक खगोलीय खोज से जुड़े विस्तृत शोध पत्र को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स’ में औपचारिक प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है। खगोलविदों का मानना है कि यह अध्ययन ब्रह्मांड में ब्लैक होल के व्यवहार और तारों के अंत को समझने में क्रांतिकारी साबित होगा।

