अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है, जो साल 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है।
1. भारत पर आर्थिक बोझ: आंकड़ों की जुबानी
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 80-85 प्रतिशत आयात करता है, जिससे कीमतों में मामूली वृद्धि भी बड़ा असर डालती है:
- आयात खर्च: विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल में 1 डॉलर की वृद्धि होने पर भारत के सालाना आयात बिल पर ₹12,000 करोड़ से ₹16,000 करोड़ तक का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- कमजोर होता रुपया: तेल की कीमतों में उछाल के कारण डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे रुपया ऐतिहासिक गिरावट के साथ ₹95 प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया है।
- महंगाई का खतरा: परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है।
2. सरकार की रणनीति: इथेनॉल मिश्रण पर जोर
पेट्रोलियम और सड़क परिवहन मंत्रालय तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए ‘ब्लेंडिंग’ (मिश्रण) का सहारा ले रहे हैं:
- E20 और E100 लक्ष्य: भारत ने पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब सरकार E100 (100% इथेनॉल) और फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
- चुनौती: हालांकि, इथेनॉल की कम ऊर्जा घनत्व (Energy Density) के कारण वाहनों के माइलेज में 6-7% की कमी देखी जा रही है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक नई चिंता का विषय है।
3. वर्तमान घरेलू तेल कीमतें (30 अप्रैल 2026)
वैश्विक दबाव के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है:
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹94.72 | ₹87.62 |
| मुंबई | ₹104.21 | ₹92.15 |
| कोलकाता | ₹103.94 | ₹90.76 |
| बेंगलुरु | ₹102.92 | ₹88.94 |
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4. वैश्विक तनाव: अमेरिका बनाम ईरान
- नाकेबंदी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान पर सख्त नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) लगा रखी है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान ने दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (जहां से वैश्विक तेल का 20% गुजरता है) पर नियंत्रण की धमकी दी है। वर्तमान में यहाँ से आपूर्ति सामान्य क्षमता की तुलना में केवल 4% रह गई है।
5. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (EY की रिपोर्ट)
इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट और ईवाई (EY) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार:
- यदि कच्चा तेल औसतन $120 पर बना रहता है, तो भारत की जीडीपी विकास दर घटकर 6% तक आ सकती है।
- खुदरा मुद्रास्फीति (Inflation) आरबीआई के ऊपरी स्तर (6%) को छू सकती है।
निष्कर्ष: सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹15-20 तक की बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

