वाजपेयी, आडवाणी, सुषमा स्वराज और जेटली के संसदीय आचरण की दी मिसाल, वोट चोरी के झूठे आरोपों पर चेताया
नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए उन्हें पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करने की नसीहत दी है। रिजिजू ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदार होती है, इसलिए राहुल गांधी को गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी छोड़कर एक परिपक्व और गंभीर विपक्षी नेता की तरह व्यवहार करना सीखना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को देश के महान लोकतांत्रिक नेताओं के संसदीय जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन शीर्ष नेताओं ने प्रतिपक्ष में रहते हुए भी सदैव संसदीय मर्यादाओं, राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को सर्वोपरि रखा और रचनात्मक विपक्ष की एक आदर्श मिसाल पेश की।
किरेन रिजिजू ने चुनावी नतीजों और ईवीएम को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जाने वाले आक्षेपों पर भी तीखा पलटवार किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी अपनी चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय लगातार ‘वोट चोरी’ और चुनावी धांधली के झूठे व निराधार आरोप लगाती रही, तो जनता का उस पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा और आने वाले चुनावों में पार्टी को इससे भी भारी राजनीतिक क्षति का सामना करना पड़ेगा।
संसदीय कार्य मंत्री ने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में जीत और हार जनता के विवेक पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का खतरनाक प्रयास है। कांग्रेस नेतृत्व को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों और नीतियों का आत्ममंथन करना चाहिए, न कि निराधार नैरेटिव गढ़कर जनादेश का अपमान करना चाहिए।
अपने वक्तव्य के समापन में रिजिजू ने उम्मीद जताई कि आगामी संसद सत्रों में नेता प्रतिपक्ष देश के विकास और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष लोकतंत्र की रीढ़ होता है, लेकिन नकारात्मक राजनीति और तथ्यहीन आरोप देश के संसदीय विमर्श को केवल नुकसान पहुंचाते हैं।

