रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर 6 अक्तूबर को उपचुनाव; मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया आदेश
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली औपचारिक सुनवाई के लिए 5 अक्तूबर की तारीख तय की है। यह घटनाक्रम इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल की दो प्रमुख विधानसभा सीटों—रेजीनगर और नंदीग्राम में 6 अक्तूबर को उपचुनाव के तहत मतदान होना निर्धारित है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले पर विचार किया। इस खंडपीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पुरजोर दलील दी कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं और इससे जुड़े कई मामले अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। चूंकि 6 अक्तूबर को मतदान होना है, इसलिए चुनाव से पहले मतदाताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए तुरंत अंतरिम सुनवाई जरूरी है।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की तात्कालिकता की दलीलों को फिलहाल स्वीकार न करते हुए इसे 5 अक्तूबर को ही सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई वैध मतदाताओं के नाम त्रुटिवश अथवा अनुचित प्रक्रिया के तहत हटाए जाने का खतरा बना हुआ है, जिससे आगामी उपचुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। अब 5 अक्तूबर को होने वाली शीर्ष अदालत की सुनवाई पर राज्य के राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग दोनों की निगाहें टिकी रहेंगी।

