पीएलआई योजना और बल्क ड्रग पार्क से टूटेगा चीन का दबदबा, 2028 तक मेडिकल उपकरणों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
अहमदाबाद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि भारतीय दवा उद्योग देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू जरूरतों के लिए दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया को उच्च गुणवत्ता वाली किफायती दवाएं उपलब्ध कराना भी है।
अहमदाबाद में आयोजित ‘फार्मइनोवा पुरस्कार समारोह 2026’ में फार्मास्युटिकल साइंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध करने वाले वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने दवा कंपनियों से अनुसंधान और विकास (R&D) पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
पीएलआई और बल्क ड्रग पार्क से घटेगी चीन पर निर्भरता गृह मंत्री ने कहा कि एक समय भारत दवा उद्योग में शीर्ष पर था, लेकिन बाद में कच्चे माल (एपीआई) के मामले में चीन का प्रभाव बढ़ गया। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई पीएलआई (PLI) योजना और थोक दवा निर्माण (बल्क ड्रग) पार्क नीति चीन के वैश्विक एकाधिकार को समाप्त करने में निर्णायक साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अब तक 67 हजार करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है और 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की दवाओं का निर्यात किया गया है।
शोध को बढ़ावा और 2028 का रोडमैप अमित शाह ने कहा कि दवा कंपनियों को नवाचार और अनुसंधान पर निवेश बढ़ाना चाहिए। यदि छोटी कंपनियां अकेले शोध नहीं कर सकतीं, तो वे आपस में साझेदारी कर मुनाफे में हिस्सेदारी के आधार पर काम कर सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नीतियों के चलते साल 2028 से पहले भारत बैंडेज से लेकर सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों जैसे जटिल मेडिकल उपकरणों के निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा।

