अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों की श्रृंखला में तीसरा जहाज; स्वदेशी युद्धपोत निर्माण को मिली रफ्तार
कोलकाता: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देते हुए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने शनिवार को भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों (एनजीओपीवी) में से तीसरे पोत ‘श्रेयस’ का सफल जलावतरण किया। रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत इस प्रमुख नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ने हुगली नदी के तट पर आयोजित एक औपचारिक समारोह में इस आधुनिक युद्धपोत को पानी में उतारा।
इस जलावतरण के साथ ही जीआरएसई ने देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। शिपयार्ड ने पांच महीने से भी कम समय के रिकॉर्ड अंतराल में इस विशेष श्रृंखला के तीन उन्नत गश्ती पोतों का जलावतरण करने में सफलता पाई है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारतीय शिपयार्डों की उच्च इंजीनियरिंग क्षमता, आधुनिक असेंबली लाइन और समयबद्ध परियोजना निष्पादन की मजबूत गति को प्रदर्शित करती है।
भारतीय नौसेना के लिए निर्मित किए जा रहे ये अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत अत्याधुनिक हथियारों, निगरानी सेंसरों, उन्नत रडार प्रणालियों और लंबी दूरी के समुद्री गश्ती उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित हैं। इनका उपयोग देश के विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की प्रभावी निगरानी, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, तस्करी रोधी अभियानों, समुद्री डकैती की रोकथाम और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों में व्यापक रूप से किया जाएगा। स्वदेशी स्तर पर इन पोतों के तीव्र निर्माण से नौसेना की तटीय और गहरे समुद्र में परिचालन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

