देशभर में चुनावी माहौल बना हुआ है। चार चरण के लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। अब पांचवें चरण का चुनाव 20 मई को होना है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में मतदान केंद्रों पर दर्ज मतों का लेखा-जोखा तुरंत अपलोड करने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका दाखिल की गई। इसी मामले पर आज अदालत में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के वकील से कहा कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रत्येक चरण के मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान केंद्रों पर दर्ज मतों का लेखा-जोखा तुरंत अपलोड करने के निर्देश मांगने वाली अर्जी पर चुनाव आयोग से निर्देश ले।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में वैवाहिक दुष्कर्म को आपराधिक कानून में अपवाद के रूप में बनाए रखने को चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य को नोटिस जारी किया है। सभी को एक याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। याचिका में तेजाब हमले के पीड़ितों (एसिड अटैक सरवाइवर्स) के लिए एक वैकल्पिक डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पादरीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिसरा की पीठ ने कहा है कि तेजाब हमले के नौ पीड़ितों की तरफ से दायर याचिका एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्रालय और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने कहा ‘हम इसे लेकर नोटिस जारी कर रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और हम इस पर सुनवाई करेंगे।’ सुप्रीम कोर्ट में एसिड अटैक कार्कर्ता प्रज्ञा प्रसून और अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई की जा रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति में सिविल न्यायाधीशों को 65 प्रतिशत कोटा प्रदान करने की गुजरात उच्च न्यायालय की नीति को बरकरार रखा है। 2005 के सेवा नियमों में बताया गया है कि राज्य में अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश कैडर में 65 प्रतिशत रिक्तियां योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर सिविल जज वाले फीडर कैडर से भरी जानी हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि 2011 से गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा अपनाई गई पदोन्नति की प्रक्रिया से भटकना न्यायिक अधिकारियों के लिए गंभीर पूर्वाग्रह का कारण बन सकता है।

