बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में ले जाने का आरोप; डेरेक ओब्रायन और दीपांकर भट्टाचार्य ने दिल्ली पुलिस को घेरा
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि, कुछ घंटों तक चले भारी सियासी हंगामे के बाद उन्हें नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया। आइसा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने नियमों की अनदेखी की और नेहा को बिना आधिकारिक नंबर प्लेट वाली एक निजी गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया, जिससे उनके साथियों को उनकी स्थिति का पता नहीं चल सका। इसके अलावा संगठन ने गाड़ी में महिला पुलिसकर्मी की गैर-मौजूदगी का भी गंभीर आरोप लगाया।
छात्र नेता को हिरासत में लिए जाने की खबर मिलते ही विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोल दिया। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने उनकी रिहाई के बाद राहत व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि इस घटना से वे बेहद चिंतित थे, लेकिन यह जानकर राहत मिली कि पुलिस की गाड़ी में ले जाने के बाद अब उन्हें नरेला थाने से छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी पूरी मजबूती से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए डटकर खड़ा है।
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पुलिसिया कार्रवाई को सीधा ‘अपहरण’ करार दिया। नेहा की रिहाई के बाद उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि एक महिला कार्यकर्ता को बिना नंबर प्लेट वाली और सिर्फ पुरुष पुलिसकर्मियों की मौजूदगी वाली गाड़ी में ले जाना तथा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के बाद रिहा करना दिल्ली पुलिस के आचरण का बेहद घटिया स्तर दर्शाता है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग उठाने वाली छात्र आवाजों को दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।

