जन्म शताब्दी कार्यक्रम में गृह मंत्री ने किया नमन; कहा- मंदिर निर्माण को कई पीढ़ियों का संघर्ष मानते थे सिंघल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ मार्गदर्शक स्वर्गीय अशोक सिंघल के ऐतिहासिक योगदान को भावपूर्ण रूप से याद करते हुए उन्हें एक ‘सच्चा स्वयंसेवक’ करार दिया। अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य स्मृति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, सनातन संस्कृति, राम जन्मभूमि आंदोलन और संगठनात्मक विस्तार के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया था।
गृह मंत्री ने उनके निस्वार्थ भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि अशोक सिंघल ने कभी इस संकीर्ण दृष्टिकोण के साथ काम नहीं किया कि कोई बड़ा राष्ट्रीय या धार्मिक संकल्प केवल किसी एक व्यक्ति के निजी जीवनकाल में ही पूरा हो। उन्होंने कहा कि यह बेहद भावुक करने वाला और अफसोसजनक पहलू है कि अशोक सिंघल स्वयं न तो भव्य राम मंदिर का ऐतिहासिक ‘भूमि पूजन’ प्रत्यक्ष देख पाए और न ही मंदिर के भव्य निर्माण को अपनी आंखों के सामने पूर्ण होते देख सके।
अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल के स्वभाव में किसी भी कार्य को पूरा करने को लेकर अधीरता या जल्दबाजी नहीं थी, बल्कि वे धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टि के धनी थे। वे राम मंदिर आंदोलन को एक ऐसा सतत और पावन संघर्ष मानते थे जो आवश्यकता पड़ने पर कई पीढ़ियों तक चल सकता है, और जिसमें अंतिम विजय के मुकाम तक पहुंचने से पहले अनगिनत कारसेवकों, संतों और नागरिकों की आहुति व योगदान शामिल होगा। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज जब अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर साकार हो चुका है, तो ऐसे में अशोक सिंघल का अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

