शीर्ष स्तर के अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक लागू होंगे नियम, आईटी एक्ट में पहले ही घटाया जा चुका है कंटेंट हटाने का समय
नई दिल्ली: केंद्र सरकार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर एक नई और व्यापक आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) लाने पर विचार कर रही है। इसके तहत अधिकारियों द्वारा अनुचित विषयों पर वीडियो बनाने, व्यक्तिगत राय जाहिर करने और अपने पद अथवा सरकारी कामकाज का अनावश्यक महिमामंडन (ग्लोरीफिकेशन) करने वाली सामग्री साझा करने पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उच्च स्तर पर इस संबंध में प्राथमिक विमर्श पूरा हो चुका है।
पद और काम के महिमामंडन वाले पोस्ट पर लगेगी लगाम
हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोक सेवा में तैनात अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया रील्स अथवा वीडियो के माध्यम से अपने रुतबे और आधिकारिक अधिकारों का प्रदर्शन करते नजर आते हैं। सरकार का मानना है कि सेवा आचरण नियमावली के तहत इस तरह की आत्म-प्रशंसा अपेक्षित गरिमा के प्रतिकूल है। प्रस्तावित आचार संहिता तैयार होने के बाद इसे शीर्ष स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर कनिष्ठ कर्मचारियों तक सभी पर समान रूप से लागू किया जाएगा, जिसमें किसी भी रैंक के कर्मी को छूट नहीं मिलेगी।
मौजूदा नियमों के अभाव को दूर करेगी नई नीति
वर्तमान व्यवस्था में लोक सेवकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट और समग्र दिशानिर्देश मौजूद नहीं हैं। नई आचार संहिता के जरिए इसी नीतिगत शून्यता को भरने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यह संहिता किस तारीख से प्रभावी होगी और इसमें विशिष्ट रूप से कौन-से प्रावधान शामिल होंगे, इसकी आधिकारिक अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना है।
आईटी नियमों और संवेदनशील कंटेंट पर पहले ही सख्ती
सरकार डिजिटल स्पेस में जवाबदेही तय करने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रही है:
कंटेंट हटाने की घटी समय-सीमा: संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट हटाने का समय 24 घंटे से घटाकर महज 2 घंटे किया जा चुका है।
अदालती व सरकारी आदेश: वैध आदेश मिलने पर गैर-कानूनी सामग्री को हटाने की समय-सीमा भी 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
डीपफेक और एआई सामग्री पर नियंत्रण: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक के दुरुपयोग को रोकने के लिए आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर नियामक तंत्र को और सख्त बनाया गया है।
शिकायत निवारण: प्रतिरूपण (इम्पपर्सनेशन) और आपत्तिजनक सामग्री से जुड़ी शिकायतों के निपटान की अवधि को 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे किया गया है।

