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Thursday, June 25, 2026

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कर्नाटक आबकारी विभाग में ₹13.3 करोड़ का महाघोटाला: ईडी की बेंगलुरु, मैसूरु और बेलगावी में बड़ी छापेमारी; अफसरों के सिंडिकेट का भंडाफोड़

बेंगलुरु: कर्नाटक के आबकारी विभाग (Excise Department) में फैले गहरे प्रशासनिक भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ी विधिक व दंडात्मक कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 17 के तहत 24 जून 2026 को राज्य के तीन प्रमुख शहरों— बेंगलुरु, मैसूरु और बेलगावी में 14 रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

इस सघन तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने अब तक कुल 13.3 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) के रूप में विधिक तौर पर जब्त किया है। जांच में सामने आया है कि आबकारी विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने विधिक पद का दुरुपयोग करते हुए परिजनों और बेनामी ठेकेदारों के नाम पर अवैध रूप से शराब के लाइसेंस बांटे और समानांतर सिंडिकेट का संचालन किया।

मुख्य आरोपी और जब्ती का विधिक विवरण
ईडी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई राज्य पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकियों (FIRs) और मनी लॉन्ड्रिंग की गोपनीय शिकायतों के आधार पर की गई है। इस विधिक कार्रवाई के मुख्य निशाने पर निम्नलिखित आबकारी अधिकारी और उनके सिंडिकेट पार्टनर थे:

जगदीश नायक (आबकारी अधिकारी)

के.एम. थम्मन्ना (आबकारी अधिकारी)

वाई.डी. मंजूनाथ (आबकारी अधिकारी)

वाई.डी. मंजूनाथ व सहयोगियों के ठिकानों से हुई विधिक जब्ती:
जब्त की गई संपत्ति का प्रकार विधिक व अनुमानित मूल्य (Value)
बेनामी बेहिसाबी नकदी (Unaccounted Cash) ₹5.5 करोड़
सोने के आभूषण व जेवरात (Gold Jewelry) ₹7.8 करोड़
विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) ₹3.3 लाख
कुल संचयी जब्ती (Total Seizure) ₹13.3 करोड़

इसके अलावा, विभिन्न परिसरों से डिजिटल डिवाइस, बेनामी संपत्तियों के विधिक कागजात और रिश्वत के लेन-देन से जुड़ी गुप्त डायरियां जब्त की गई हैं।

कैसे काम करती थी भ्रष्टाचार की यह ‘समानांतर मशीन’?
ईडी की विधिक जांच में आबकारी विभाग के अधिकारियों और निजी बिचौलियों के काम करने के बेहद चौंकाने वाले और संगठित तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है:

मासिक बंधी (Monthly Bribery): यह सिंडिकेट एक सुव्यवस्थित मशीन की तरह काम कर रहा था। राज्य की विभिन्न शराब दुकानों और बार मालिकों से फील्ड अधिकारियों को हर महीने एक निश्चित विधिक रिश्वत देनी पड़ती थी।

लाइसेंस सिंडिकेट: नए लाइसेंस जारी करने, पुराने लाइसेंसों के विधिक नवीनीकरण (Renewal) और ट्रांसफर (स्थानांतरण) के एवज में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जाती थी।

अनौपचारिक ‘कैश बुक’: बिचौलियों के जरिए इकट्ठा की गई इस काली कमाई को एक जगह जमा किया जाता था। ईडी ने एक ठिकाने से एक अनौपचारिक कैश बुक जब्त की है, जिसमें किस अधिकारी को कितनी विधिक रिश्वत मिली और किसे बांटी गई, इसका पूरा लेखा-जोखा दर्ज है।

इस अवैध पैसे का इस्तेमाल अधिकारियों द्वारा अचल संपत्तियां (Land & Luxury Properties) खरीदने, बेनामी लेनदेन करने और अपने करीबियों के नाम पर अन्य व्यवसायों में निवेश करने के लिए किया जा रहा था। ईडी अब जब्त किए गए डिजिटल डेटा और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को विधिक समन जारी कर कस्टोडियल पूछताछ की तैयारी कर रही है।

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