ऑनलाइन दुष्कर्म की धमकी, डॉक्सिंग और AI डीपफेक के खिलाफ सख्त व समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग पर PIL का निपटारा
नई दिल्ली:
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह ऑनलाइन होने वाले गंभीर और गैर-कानूनी डिजिटल नुकसानों से निपटने के लिए याचिकाकर्ता के सुझावों पर गंभीरता से विचार करे और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों और तकनीकी खतरों को प्रमुखता से रेखांकित करने की सराहना की।
किन गंभीर डिजिटल खतरों पर जताई गई चिंता?
याचिका में डिजिटल स्पेस में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक तात्कालिक व आपातकालीन (Emergency System) व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी:
- शारीरिक व यौन हिंसा की धमकियां: ऑनलाइन माध्यम से दुष्कर्म, हत्या या शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियों पर तत्काल रोक।
- डॉक्सिंग (Doxxing): किसी व्यक्ति के घर का पता, निजी संपर्क नंबर या बच्चों के स्कूल की लोकेशन को बिना अनुमति सार्वजनिक करना।
- AI, डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए गैर-सहमति वाले अंतरंग या फर्जी डीपफेक वीडियो और तस्वीरों का प्रसार।
- डिजिटल प्रतिरूपण (Impersonation): किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी या छवि धूमिल करना।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और निर्देश
| विषय | अदालत की टिप्पणी एवं निर्देश |
|---|---|
| विशेषज्ञों की भूमिका | कोर्ट ने माना कि ऑनलाइन खतरों को रोकने के तकनीकी उपाय डोमेन विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) के विचार का विषय हैं। |
| मंत्रालयों को निर्देश | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा कानून एवं न्याय मंत्रालय को 22 जून 2026 को भेजे गए सुझाव पत्र पर विचार कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश। |
| सेंसरशिप बनाम सुरक्षा | याचिका में स्पष्ट किया गया कि इसका उद्देश्य व्यापक सेंसरशिप नहीं, बल्कि URL-विशिष्ट और कंटेंट-विशिष्ट आधार पर न्यायिक समीक्षा के अधीन कार्रवाई करना है। |
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय और डिजिटल नुकसान फैलने की तीव्र गति के बीच बहुत बड़ा अंतर है, जिसके लिए एक त्वरित, पारदर्शी और समय-सीमा से बंधी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है।

