27.2 C
Mumbai
Monday, September 28, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

महाराष्ट्र में सूखे से किसानों की आजीविका पर संकट: चारे के लिए डंठल बटोरने को मजबूर, शरद पवार ने की विशेष सत्र की मांग

74 फीसदी हिस्सा सूखाग्रस्त घोषित; ऋण पुनर्गठन और बिजली बिल राहत का ऐलान, मुआवजे को लेकर असमंजस बरकरार

लातूर: महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की भारी कमी के कारण सूखे की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे किसानों की आजीविका और दैनिक जीवन पर गहरा संकट मंडराने लगा है। लातूर जिले की उदगीर तहसील सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों में मानसूनी बारिश न होने के चलते तैयार हो रही सोयाबीन की फसल पूरी तरह सूखकर बर्बाद हो चुकी है। खेतों में खड़ी फसल से किसी भी प्रकार की आर्थिक कमाई की उम्मीद टूटने के बाद अब लाचार किसान सूखे पौधों के डंठल काटने और इकट्ठा करने को विवश हैं, ताकि कम से कम आने वाले दिनों में अपने मवेशियों के लिए सूखे चारे का प्रबंध किया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय दुधारू पशुओं के लिए हरे और सूखे दोनों प्रकार के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय सीमांत किसान दिलीप राठौड़ ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि सोयाबीन की फसल से अब किसी वित्तीय लाभ की संभावना नहीं बची है। ऐसे में खेत में फसल को यूं ही छोड़ने के बजाय डंठल जमा किए जा रहे हैं, जिससे मवेशियों को कुछ समय तक भूखा रहने से बचाया जा सके। हालांकि राज्य सरकार ने कई तहसीलों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया है, लेकिन प्रति हेक्टेयर मिलने वाली वास्तविक वित्तीय राहत और मुआवजे के वितरण को लेकर किसानों के बीच अभी भी अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बढ़ते संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों यानी लगभग 74 प्रतिशत भूभाग को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। राहत पैकेज के तहत सरकार ने किसानों के फसल ऋणों के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में छूट और कृषि कार्यों से जुड़े बिजली बिलों में राहत देने सहित कई प्रशासनिक कदमों की घोषणा की है। इसी बीच, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने इस आपदा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखा है। पवार ने राज्य में सूखे के हालात पर विस्तृत चर्चा करने और त्वरित राहत उपायों को बिना देरी लागू कराने के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष सत्र तुरंत बुलाने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में सभी प्रभावित तालुकों को अविलंब सूखाग्रस्त मानकर संपूर्ण भूमि राजस्व पूरी तरह माफ करने का आग्रह किया है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here