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Saturday, March 28, 2026

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विशेष विश्लेषण: सीएपीएफ (GA) बिल 2026 और पदोन्नति का ‘पिरामिड संकट’

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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में पदोन्नति का गतिरोध अब केवल राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) तक सीमित नहीं रह गया है। सेवानिवृत्त अधिकारी तरुण कुमार बंजारी (UPSC CPF 2004 बैच) के विश्लेषण के अनुसार, आईपीएस प्रतिनियुक्ति का ‘चेन रिएक्शन’ बल के सबसे निचले स्तर यानी सिपाही (Constable) तक पहुंच रहा है। प्रस्तावित ‘सीएपीएफ (जी.ए) बिल 2026’ में डीआईजी स्तर पर आईपीएस कोटा खत्म करने का स्वागत तो हुआ है, लेकिन आईजी स्तर पर 50% पदों को ‘कानूनी रूप से लॉक’ करने को एक घातक दोष बताया जा रहा है।मौजूदा व्यवस्था बनाम प्रस्तावित विधेयक 2026तरुण कुमार के अनुसार, पदोन्नति की बाधा को समझने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है:रैंक स्तरमौजूदा आईपीएस कोटा (कार्यकारी आदेश)प्रस्तावित कोटा (विधेयक 2026)डीआईजी (DIG)20% आरक्षित0% (पूर्णतः कैडर अधिकारी)आईजी (IG)50% आरक्षित50% (कानून में स्थायी रूप से दर्ज)एडीजी (ADG)75% आरक्षित67% (मामूली कमी)डीजी (DG)100% आरक्षित100% (यथावत)’चेन रिएक्शन’: 2 आईजी पद और 15 अवरुद्ध पदोन्नतियांसीएपीएफ में पदोन्नति ‘रिक्ति-आधारित’ (Vacancy-based) होती है। जब शीर्ष पर एक पद आईपीएस द्वारा भरा जाता है, तो नीचे की पूरी श्रृंखला थम जाती है। तरुण कुमार ने गणितीय आधार पर समझाया है कि मात्र 2 आईपीएस आईजी किस प्रकार 10 अलग-अलग रैंकों में 15 से अधिक पदोन्नतियों को रोक देते हैं:शीर्ष स्तर: 2 कैडर अधिकारी आईजी नहीं बन पाते।मध्य स्तर: वरिष्ठ कमांडेंट, डीआईजी नहीं बन पाते; टूआईसी (2IC), कमांडेंट नहीं बन पाते।कनिष्ठ स्तर: डिप्टी कमांडेंट (DC) और सहायक कमांडेंट (AC) का प्रमोशन रुकता है।अधीनस्थ रैंक: इंस्पेक्टर राजपत्रित अधिकारी नहीं बन पाते; सब-इंस्पेक्टर और एएसआई (ASI) की सीढ़ी जाम हो जाती है।जमीनी स्तर: हवलदार (Head Constable) और कांस्टेबल (Constable) का प्रमोशन रुक जाता है क्योंकि उनके ऊपर के पद खाली नहीं होते।सेवा काल का बड़ा अंतर (करियर विसंगति)आंकड़े बताते हैं कि एक आईपीएस अधिकारी और एक कैडर अधिकारी के करियर ग्राफ में जमीन-आसमान का अंतर है:आईपीएस: लगभग 13 वर्ष में डीआईजी और 18 वर्ष में आईजी बन जाते हैं।कैडर अधिकारी: इसी स्तर तक पहुँचने में 31 से 33 वर्ष का समय लग जाता है।उदाहरण: बीएसएफ (BSF) में 1987 बैच का सबसे वरिष्ठ कैडर अधिकारी अभी भी आईजी है, जबकि 1995-97 बैच के आईपीएस अधिकारी वहां एडीजी (ADG) के पदों पर तैनात हैं।”जब शीर्ष पर पाइपलाइन अवरुद्ध होती है, तो वह सिपाही भी प्रभावित होता है जो 16-20 वर्षों से एक ही रैंक पर देश की सीमा की रक्षा कर रहा है। यह केवल पद का नहीं, बल्कि मनोबल और आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न है।”— तरुण कुमार बंजारी, पूर्व कैडर अधिकारीविधेयक पर मुख्य आपत्तिआलोचकों का कहना है कि न्यायालय ने आईजी स्तर पर कोटा हटाने के संकेत दिए थे, लेकिन यह विधेयक इसे कानून बनाकर ‘स्थायी’ कर रहा है। इससे भविष्य में किसी भी कार्यकारी बदलाव की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और बल के भीतर ‘पदोन्नति का अकाल’ बना रहेगा।क्या आप सीएपीएफ बिल 2026 के खिलाफ होने वाले देशव्यापी आंदोलनों या नक्सल क्षेत्रों में तैनात जवानों पर इसके प्रभाव के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं?

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