नई दिल्ली, 29 मार्च 2026
अमेरिका के विख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी डी सैक्स ने पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ब्रिक्स (BRICS) देशों की भूमिका की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया में प्रभावी हस्तक्षेप न कर पाना ब्रिक्स के लिए एक “खोया हुआ और अंतिम अवसर” है। विशेष रूप से भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का जिक्र करते हुए सैक्स ने कहा कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संवाद करने के लिए एक मजबूत उम्मीदवार था, लेकिन इसके बावजूद मध्यस्थता की कमान पाकिस्तान जैसे देशों के हाथ में दिखने वाली खबरें “अजीब” और निराशाजनक हैं।
पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली गठबंधन की उस सैन्य कार्रवाई के बाद बढ़ा, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और अन्य वरिष्ठ कमांडरों की हत्या कर दी गई थी। इसके जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत इजरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों हमले किए हैं, जिसमें हाल ही में अमेरिकी रसद बेड़े को नष्ट करने का दावा भी शामिल है। वहीं इजराइल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए ईरान के भीतर मिसाइल बुनियादी ढांचे और कमान केंद्रों को निशाना बनाया है।
इस बढ़ते सैन्य टकराव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे वैश्विक ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया है। अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्री शांति योजना को तेहरान ने यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह वाशिंगटन की शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं है। राजनयिक प्रयासों की विफलता और बढ़ते ड्रोन-मिसाइल हमलों ने अब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

