नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय और सामरिक संबंधों को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ हैदराबाद हाउस में मुलाकात की, जहाँ दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रमुख बिंदु: भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता
- आर्थिक और ऊर्जा सहयोग: डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
- राजनीतिक स्थिरता: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत और रूस के राजनीतिक तालमेल को उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
- कनेक्टिविटी और तकनीक: दोनों देशों ने विज्ञान, तकनीक और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में गंभीरता से काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और ‘डी-रिस्किंग’
बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) को मजबूत करने की साझा रुचि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण (Diversification) की प्रक्रिया से दोनों देशों को लाभ मिल रहा है। उनके अनुसार, भारत-रूस संबंध गहरे विश्वास पर आधारित हैं, जो जटिल अंतरराष्ट्रीय स्थितियों में भी स्थिर बने हुए हैं।
ब्रिक्स बैठक में वैश्विक प्रतिनिधियों का जमावड़ा
यह बैठक भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रही है क्योंकि इसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए:
- मालदीव: डॉ. जयशंकर ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम आदम से मुलाकात की।
- ईरान: ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अराघची भी इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुँच चुके हैं। ईरानी दूतावास ने उनके इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि की है।

