नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का बहुचर्चित ‘त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामला’ अब देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई आगामी 25 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ (बेंच) करेगी।
शीर्ष अदालत ने स्वतः संज्ञान क्यों लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को असाधारण मानते हुए बिना किसी औपचारिक अपील या याचिका के खुद ही हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस केस को एक व्यापक और गंभीर शीर्षक दिया है:
अदालती शीर्षक: “मैट्रिमोनियल होम (ससुराल) में युवा महिला की अप्राकृतिक मृत्यु में कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक विसंगतियों के संबंध में।”
न्यायालय के इस कड़े कदम का सीधा संकेत है कि वह न केवल महिला की संदिग्ध मौत की जांच करेगा, बल्कि इस मामले में शुरुआती पुलिसिया कार्रवाई के दौरान हुए कथित संस्थागत पक्षपात, जांच में ढिलाई और कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन (प्रक्रियात्मक विसंगतियों) की भी गहराई से समीक्षा करेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह संवेदनशील मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स स्थित एक निवास से जुड़ा है:
- घटना की तारीख: 12 मई को त्विषा शर्मा का शव उनके ससुराल के घर में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था।
- पृष्ठभूमि: त्विषा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं।
- वैवाहिक स्थिति: कुछ महीने पहले ही उनकी शादी भोपाल के रहने वाले अधिवक्ता (वकील) समर्थ सिंह के साथ हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल में उनकी अप्राकृतिक और संदिग्ध मृत्यु हो गई, जिसके बाद से ही निष्पक्ष जांच को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में सीधे दखल देने के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक महकमे पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का भारी दबाव बन गया है।

