बेंगलुरु: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्नाटक दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में चूक और एक संदिग्ध कार्टन बॉक्स मिलने के मामले में फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की अंतिम रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी राहत दी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बॉक्स में मिले विस्फोटक पूरी तरह निष्क्रिय थे और उनसे किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं था।
यह संदिग्ध बॉक्स प्रधानमंत्री के काफिले के निर्धारित मार्ग से गुजरने से ठीक डेढ़ घंटे पहले एक सतर्क कांस्टेबल को बरामद हुआ था, जिसके बाद हड़कंप मच गया था।
फोरेंसिक लैब (FSL) रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
स्थानीय पुलिस को सौंपी गई आधिकारिक फोरेंसिक रिपोर्ट में घटना को लेकर कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां साझा की गई हैं:
- पुरानी जिलेटिन स्टिक्स: कार्टन बॉक्स के भीतर से बरामद की गई दोनों जिलेटिन स्टिक्स (Gelatin Sticks) लगभग तीन साल पुरानी थीं। लंबे समय से पड़े रहने के कारण उनकी मारक क्षमता खत्म हो चुकी थी।
- खराब टाइमर: शुरुआती जांच में बॉक्स के साथ एक टाइमर डिवाइस जुड़े होने की बात सामने आई थी, लेकिन एफएसएल जांच में स्पष्ट हुआ है कि वह टाइमर पूरी तरह खराब (Defective) और काम न करने की स्थिति में था।
- कोई डेटोनेटर नहीं: रिपोर्ट में सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि इस पूरे सेटअप में कोई भी डेटोनेटर (Detonator) मौजूद नहीं था। बिना डेटोनेटर के जिलेटिन स्टिक्स में किसी भी प्रकार का स्वतः विस्फोट होना तकनीकी रूप से असंभव है।
इन तथ्यों के आधार पर विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि इस लावारिस बक्से से प्रधानमंत्री की सुरक्षा या आम जनता को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था।
NIA और IB की जांच, अब तक कोई सफलता नहीं
भले ही फोरेंसिक रिपोर्ट में खतरे को खारिज कर दिया गया हो, लेकिन प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण केंद्रीय एजेंसियां इसे बेहद गंभीरता से ले रही हैं:
- केंद्रीय एजेंसियों की एंट्री: स्थानीय पुलिस के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के वरिष्ठ जांचकर्ताओं ने भी घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य और महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।
- नई वस्तुओं का पता चला: पुलिस सूत्रों ने शुरुआत में बताया था कि बॉक्स में केवल दो जिलेटिन स्टिक और एक माचिस की डिब्बी थी। लेकिन कुछ दिनों बाद, जब एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में लिया और गहनता से छानबीन की, तो कार्टन बॉक्स के अंदर से कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी बरामद हुईं।
- पड़ोसी राज्यों में छापेमारी: संदिग्धों की तलाश और इस सिंडिकेट का पता लगाने के लिए पुलिस और विशेष जांच दलों को तत्काल पड़ोसी राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के साथ-साथ कर्नाटक के सीमावर्ती जिलों में भेजा गया था।
सस्पेंस बरकरार:
तमाम कड़ियों को जोड़ने और गहन तकनीकी व जमीनी जांच के बावजूद, पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को अब तक इस मामले में कोई बड़ी सफलता या ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या यह किसी शरारती तत्व द्वारा केवल दहशत फैलाने या सुरक्षा जांच को परखने के लिए किया गया कोई सुनियोजित प्रयास था।

