कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सोमवार (1 जून 2026) को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मंत्रिपरिषद का पहला ऐतिहासिक विस्तार पूरा हो गया। राजभवन (लोक भवन) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल आर. एन. रवि ने 35 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस नए विस्तार के बाद बंगाल कैबिनेट की कुल सदस्य संख्या बढ़कर अब 41 हो गई है। इस पूरे फेरबदल में उत्तर दिनाजपुर जिले की करनदीघी सीट से भाजपा विधायक विराज बिस्वास सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं, जो महज 32 वर्ष की उम्र में इस नई सरकार के सबसे युवा चेहरे (राज्य मंत्री) बनकर उभरे हैं।
एबीवीपी की छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक का सफर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले विराज बिस्वास ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। कानून (वकालत) की पढ़ाई कर चुके विराज पहली बार सितंबर 2018 में इस्लामपुर के दारीभिट हाई स्कूल में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के दौरान प्रदेश स्तर पर चर्चा में आए थे। इसके बाद उन्होंने एबीवीपी के प्रदेश सचिव और फिर राष्ट्रीय सचिव के रूप में उत्तर बंगाल में कई छात्र आंदोलनों का कुशल नेतृत्व किया।
पेशा से वकील होने के कारण वे लगातार उन लोगों के मुकदमों की पैरवी करते रहे जो राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार थे। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने करनदीघी सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता गौतम पाल को करीब 20 हजार मतों के भारी अंतर से शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक धाक जमाई थी। उनकी मां बीना बिस्वास ने भावुक होते हुए पीटीआई (PTI) से कहा कि विराज का बचपन से ही राजनीति के जरिए जनसेवा करने का सपना था, जो आज पूरी तरह सच हो गया है।
वरिष्ठ नेताओं को मिली जगह, उत्तर बंगाल का दिखा दबदबा
इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता और कद्दावर नेता तापस रॉय सहित 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। उत्तर बंगाल में भाजपा के शानदार चुनावी प्रदर्शन का सीधा असर इस कैबिनेट विस्तार में देखने को मिला, जहाँ से कई विधायकों को लालबत्ती दी गई है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इस मंत्रिपरिषद के जरिए युवा जोश और अनुभवी प्रशासनिक चेहरों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
‘जनता की सेवा ही प्राथमिकता’: आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ
इस मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद पानीहाटी से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक और आरजी कर अस्पताल की मृत महिला डॉक्टर की मां रत्ना देबनाथ का एक बेहद बड़ा और गंभीर बयान सामने आया है। उन्हें कैबिनेट में शामिल न किए जाने के सवाल पर उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “मुझे मंत्री न बनाए जाने से रत्ती भर भी कोई फर्क नहीं पड़ता। राजनीति में आना या सत्ता का सुख भोगना मेरी प्राथमिकता कभी नहीं रही। मैं अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने राजनीति में आई थी और एक विधायक के रूप में बंगाल की जनता की सेवा निरंतर करती रहूंगी।”
पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पानीहाटी से विधायक रत्ना देबनाथ और हिंगलगंज से चुनाव जीतीं रेखा पात्रा के नामों पर संगठन में कभी मंत्री पद के लिए विचार नहीं किया गया था, क्योंकि वे विधायक के रूप में ही अपने क्षेत्रों को मजबूत करना चाहती हैं।

