नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित विधिक व प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर जारी राष्ट्रव्यापी आक्रोश के बीच दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनने जा रहा है। डिजिटल व्यंग्य संगठन से राजनीतिक विधिक पहचान बनाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार (26 जून 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की विधिक मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान का बिगुल फूंक दिया है।
अभिजीत दिपके ने देश के छात्रों, अभिभावकों, किसानों और नागरिक समाज से 28 जून 2026 (रविवार) को जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले ‘प्रधान गो बैक’ (प्रधान वापस जाओ) महा-अभियान में शामिल होने का आधिकारिक विधिक आह्वान किया है।
1. सोनम वांगचुक शुरू करेंगी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिपके ने एक बड़ा रणनीतिक खुलासा किया कि प्रख्यात पर्यावरणविद्, शिक्षक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक भी रविवार से इस ‘प्रधान वापस जाओ’ अभियान का हिस्सा बनेंगी।
- विधिक मांग और हड़ताल: छात्रों को विधिक न्याय दिलाने के लिए सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Hunger Strike) पर बैठेंगी।
- जवाबदेही का प्रश्न: दिपके ने तीखा विधिक प्रहार करते हुए कहा, “नीट पेपर लीक विवाद को सामने आए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय ने इसकी कोई नैतिक व विधिक जिम्मेदारी नहीं ली है। यह देश के लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि कथित प्रशासनिक विफलता और मानसिक तनाव के कारण देश में 20 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन किसी भी शीर्ष विधिक प्राधिकारी को अब तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया है।”
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग: “शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लें, नहीं तो…”
सीजेपी के संस्थापक ने इस राष्ट्रीय मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विधिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है:
- मुआवजे की मांग: आंदोलनकारियों ने कथित तौर पर मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ के विधिक मुआवजे और पूरे परीक्षा तंत्र की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।
- अक्षम प्रधानमंत्री का तमगा: दिपके ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी तुरंत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सुनिश्चित नहीं कराते हैं, तो इतिहास और देश की युवा जनता उन्हें एक ‘अक्षम प्रधानमंत्री’ के रूप में विधिक रूप से दर्ज करेगी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के प्रदर्शनों से उनका आंदोलन अलग है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधिक लड़ाई को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केवल छात्रों के भविष्य के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
3. प्रदर्शनकारियों पर हमले और पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप
जंतर-मंतर पर 20 जून 2026 से लगातार धरना दे रहे सीजेपी के मुख्य कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर गंभीर विधिक सवाल उठाए हैं:
- स्वयंसेवकों का उत्पीड़न: दिपके ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे स्वयंसेवकों और उनके लिए भोजन लाने वाले लोगों को कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा विधिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। एक मामले में तो वॉलंटियर के ससुराल तक बाहरी लोग घुस गए।
- पुलिस की विधिक निष्क्रियता: लिखित शिकायतें दिए जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस हमलावरों पर विधिक कार्रवाई करने के बजाय अदालती आदेश (Court Order) का बहाना बनाकर टालमटोल कर रही है। प्रदर्शनकारियों को अंदेशा है कि यह पूरा हमला आंदोलन को दबाने की एक पूर्व-नियोजित (Pre-planned) विधिक साजिश का हिस्सा है।
दिपके ने अंत में स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दे भी देते हैं, तो भी देश के परीक्षा विधिक ढांचे (Examination Framework) में अमूल-चूल सुधार होने तक जनता का यह गुस्सा और मुख्य न्यायिक समिति का यह देशव्यापी आंदोलन थमने वाला नहीं है।

