नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोमवार (29 जून 2026) को अफगानिस्तान की भौगोलिक सीमा के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए घातक हवाई और जमीनी सैन्य हमलों की कड़े शब्दों में विधिक व कूटनीतिक निंदा की है। पाकिस्तान ने बीते 28 जून 2026 को डूरंड रेखा के पार एक बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए अफगानिस्तान के भीतर कथित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि हुई है।
इस गंभीर क्षेत्रीय संकट पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक कड़ा आधिकारिक विधिक वक्तव्य जारी कर पाकिस्तान की इस सैन्य कार्रवाई को अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए एक सीधा खतरा करार दिया है।
1. “अफगान संप्रभुता पर हमला और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा” — विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक विधिक और कूटनीतिक बयान में पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
- खुली आक्रामक कार्रवाई: “भारत, पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के संप्रभु क्षेत्र पर किए गए हवाई हमलों की तीव्र विधिक निंदा करता है। इन हमलों में निर्दोष महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिकों की दुखद मौत हुई है। पाकिस्तान की यह खुली आक्रामक कार्रवाई (Aggressive Action) अंतरराष्ट्रीय विधिक मानदंडों और अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा प्रहार है।”
- आंतरिक विफलताओं का बहाना: भारत ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान को लताड़ते हुए सीधे शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान के लगातार गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाती है। यह उसकी अपनी राजनीतिक, आर्थिक और आंतरिक विफलताओं से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए सीमाओं के पार हिंसक और अवैध कार्रवाइयों का सहारा लेने की एक और निरर्थक कोशिश है।
3. अफगानिस्तान के प्रति भारत की अटूट विधिक व मानवीय प्रतिबद्धता
संकट की इस घड़ी में भारत सरकार ने युद्धग्रस्त अफगान नागरिकों के प्रति अपनी पुरानी और मजबूत कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराया है:
- मानवीय संवेदनाएं: विदेश मंत्रालय ने इस सैन्य हमले में अपने प्रियजनों और मासूम बच्चों को खोने वाले पीड़ित अफगान परिवारों के प्रति अपनी गहरी विधिक व मानवीय संवेदना व्यक्त की है, साथ ही हमले में गंभीर रूप से घायल हुए नागरिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
- अखंडता का समर्थन: भारत ने स्पष्ट किया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता (Sovereignty) और उसकी क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) के प्रति अपने ऐतिहासिक व अटूट समर्थन पर हमेशा कायम रहेगा और दक्षिण एशिया में बलपूर्वक सीमाएं बदलने या पड़ोसी देशों पर हवाई हमलों जैसी एकतरफा विधिक आक्रामकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

