मुंबई: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं (किसानों) को अब तक की सबसे बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार (2 जून 2026) को हुई कैबिनेट बैठक में ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना’ को आधिकारिक हरी झंडी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य के संकटग्रस्त किसानों का 2 लाख रुपये तक का फसल ऋण (क्रॉप लोन) पूरी तरह माफ किया जाएगा। सरकार ने इस बार बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि योजना में जमीन की सीमा (लैंड होल्डिंग) का कोई नियम या शर्त नहीं रखी गई है, जिससे राज्य के लाखों छोटे-बड़े किसानों को सीधा वित्तीय लाभ मिलना तय है।
तीन चरणों में लागू होगी योजना; जानिए समय सीमा और पात्रता
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह योजना मुख्य रूप से तीन हिस्सों— पूर्ण कर्ज माफी, वन टाइम सेटलमेंट (OTS) और ईमानदार किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में लागू की जाएगी।
- कर्ज माफी का दायरा: योजना के तहत 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए सभी अल्पकालीन फसल ऋण शामिल होंगे।
- पात्रता मानदंड: जिन किसानों का 30 सितंबर 2025 तक बकाया कर्ज 2 लाख रुपये तक है और वे 31 मार्च 2026 तक इसे चुकाने में असमर्थ रहे हैं, उनका पूरा लोन सरकार माफ करेगी।
₹2 लाख से अधिक कर्ज वाले और समय पर लोन चुकाने वालों को भी राहत
- वन टाइम सेटलमेंट (OTS): यदि किसी किसान पर 2 लाख रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है, तो वह 31 मार्च 2027 तक 2 लाख से ऊपर की अतिरिक्त राशि खुद बैंक में जमा करके इस योजना के तहत ₹2 लाख तक की कर्जमाफी का लाभ उठा सकता है।
- ईमानदार किसानों को इनाम: जिन किसानों ने बैंक अनुशासन का पालन करते हुए समय पर अपना कर्ज चुकाया है, उन्हें सरकार प्रोत्साहित करेगी। साल 2022-23 से 2024-25 के बीच कम से कम दो बार समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी।
किसे नहीं मिलेगा लाभ? ये दस्तावेज होंगे अनिवार्य
प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने कुछ संपन्न वर्गों को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा है। इसमें सरकारी व अर्धसरकारी कर्मचारी, आयकर दाता (Income Tax Payers), राजनीतिक दलों के निर्वाचित पदाधिकारी और सहकारी संस्थाओं के ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जिनका मासिक वेतन 25 हजार रुपये से अधिक है।
यह योजना राष्ट्रीयकृत, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों से लोन लेने वाले सभी किसानों पर लागू होगी। योजना का पारदर्शी लाभ उठाने के लिए किसानों का बैंक खाते से बायोमेट्रिक/पहचान सत्यापन होना और सरकार के ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) प्लेटफॉर्म पर डिजिटल पंजीकरण होना अनिवार्य किया गया है।
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विपक्ष ने घेरा, कहा- ‘यह सिर्फ चुनावी घोषणा न बने’
दूसरी ओर, इस योजना के सामने आते ही राज्य में राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) ने योजना की कड़े नियमों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि कर्जमाफी को बिना किसी जटिल नियम और शर्तों के सभी किसानों पर पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए ताकि यह सिर्फ एक कागजी घोषणा बनकर न रह जाए। हालांकि, राज्य सरकार का दृढ़ दावा है कि बढ़ती लागत और मौसम की बेरुखी झेल रहे महाराष्ट्र के किसानों को इस आर्थिक संकट से उबारने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

