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Sunday, June 28, 2026

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का विधिक विभाजन: ऋतब्रत बनर्जी गुट की बैठक में जुटे 47 पूर्व पार्षद; डोला सेन ने दर्ज कराई ‘धोखाधड़ी और गलत पहचान’ की FIR

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक उलटफेर के बाद अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ा विधिक और संगठनात्मक संकट खड़ा हो गया है। निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी और बागी विधायक संदीपन साहा के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता के पूर्व पार्षदों के साथ एक और महत्वपूर्ण बैठक की है, जिसे पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक विधिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी के प्रति वफादार ‘कालीघाट विंग’ ने इस कदम का कड़ा विधिक जवाब देते हुए बागी नेताओं के खिलाफ ‘धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान बताने’ (Forgery and Misrepresentation) के संगीन आरोपों में पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई हैं।

1. एक सप्ताह में दूसरी गुप्त बैठक: बैनरों से ममता बनर्जी की तस्वीरें गायब

कोलकाता नगर निगम (KMC) के भंग होने के बाद शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है:

  • संख्या बल का प्रदर्शन: शनिवार (27 जून 2026) को पूर्वी कोलकाता के टोपसिया स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में हुई इस बैठक में 47 पूर्व टीएमसी पार्षद शामिल हुए। इससे पहले 22 जून 2026 को न्यू टाउन के एक फाइव-स्टार होटल में भी ऐसी ही बैठक हुई थी।
  • रणनीतिक उद्देश्य: इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य आगामी नगर निकाय चुनावों (KMC Elections) के लिए विधिक रोडमैप तैयार करना और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद जमीन पर पकड़ मजबूत करना है।
  • चिह्न का प्रयोग, चेहरे से दूरी: दोनों बैठकों के आधिकारिक विधिक बैनरों पर ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘घास और दो फूल’ तो प्रमुखता से अंकित थे, परंतु आश्चर्यजनक रूप से पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी की तस्वीरें पूरी तरह नदारद थीं।

2. कालीघाट विंग का विधिक पलटवार: डोला सेन ने दर्ज कराई FIR

बागी गुट द्वारा पार्टी के नाम और प्रतीकों के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए ममता बनर्जी की करीबी और टीएमसी की संयुक्त राष्ट्रीय सचिव डोला सेन ने मोर्चा संभाला है:

  • विधिक शिकायतें: डोला सेन ने न्यू टाउन और प्रगति मैदान पुलिस थानों में दो अलग-अलग आपराधिक प्राथमिकियां (Complaints) दर्ज कराई हैं।
  • लगाए गए विधिक आरोप:
    1. बागी गुट ने पार्टी के विधिक व पंजीकृत चुनाव चिह्न के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की है।
    2. ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम का अनुचित और अनधिकृत विधिक इस्तेमाल कर आम जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।
    3. बिना आधिकारिक विधिक अनुमति के बैठकें आयोजित करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज (Forged Documents) और भ्रामक इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रसारित किए गए हैं।

‘हम ही असली TMC हैं और विधानसभा में मुख्य विपक्ष’ — संदीपन साहा
इन विधिक शिकायतों को खारिज करते हुए बागी विधायक और विधानसभा में पार्टी के उपनेता संदीपन साहा ने दावा किया: “हम ही विधिक और व्यावहारिक रूप से असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है और हम राज्य विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित हैं। हमारी विधिक वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। हमने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति (National Executive) का गठन भी कर लिया है।”

महुआ मोइत्रा का विधिक व राजनीतिक वक्तव्य:

इस संगठनात्मक विभाजन पर ममता बनर्जी की वफादार सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखा विधिक पलटवार किया है:

“बागी विधायक धरातल के राजनीतिक संघर्ष से अधिक केवल कानूनी और संगठनात्मक विवादों (Organizational Disputes) में उलझे हुए हैं। वे यह भूल रहे हैं कि टीएमसी का यह प्रसिद्ध चुनाव चिह्न स्वयं ममता बनर्जी ने विधिक रूप से तैयार किया था। पार्टी को मिलने वाला जनसमर्थन किसी भी अन्य चेहरे के बजाय केवल उनके नेतृत्व पर आधारित है। हालिया राजनीतिक उठापटक के बावजूद ममता बनर्जी के पक्ष में 2.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अटूट विधिक जनादेश (Mandate) कायम है। चंद पार्षदों या विधायकों के जाने से पार्टी के विधिक जनाधार पर रत्ती भर भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।”

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