कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षर (फर्जी सिग्नेचर) का मामला अब पूरी तरह कानूनी और प्रशासनिक शिकंजे में घिर गया है। मामले की तफ्तीश कर रही राज्य पुलिस की अपराध जांच विभाग (CID) ने बैंकशाल कोर्ट में एक अहम अर्जी दाखिल कर आरोपी विधायकों के लिखावट के नमूने (Handwriting Specimen) लेने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है। अब सीआईडी इस मामले में नामजद तीन टीएमसी विधायकों— बहारुल इस्लाम, सुभाषिस दास और अरूप रॉय के हस्ताक्षर व लिखावट के नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच कराएगी।
DIG की अगुवाई में 5 सदस्यीय SIT; मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा खुलासा
इस हाई-प्रोफाइल जालसाजी की जांच के लिए सीआईडी ने डीआईजी (DIG) रैंक के एक शीर्ष अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। यह मामला तब दर्ज हुआ था जब विधानसभा सचिव ने हरे स्ट्रीट थाने में हस्ताक्षरों में विसंगतियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
इस बीच, राज्य में राजनीतिक हलचल उस वक्त तेज हो गई जब टीएमसी ने अपने दो विधायकों— रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद सूबे के मुख्यमंत्री और पुलिस मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “विधानसभा में हस्ताक्षर जालसाजी को लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले भी यही दोनों विधायक (रिताब्रत और संदीपन) थे। चूंकि मैं राज्य का पुलिस मंत्री हूँ, इसलिए जैसे ही यह गंभीर जालसाजी मेरे संज्ञान में आई, मैंने तुरंत दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सीआईडी जांच के कड़े आदेश दे दिए थे।”
क्यों और कैसे उलझा यह पूरा चुनावी विवाद?
इस पूरे विवाद की पटकथा 4 मई को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद लिखी गई थी:
- 6 मई की बैठक: पूर्व सत्तारूढ़ दल टीएमसी के सामने नेता प्रतिपक्ष, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर तकनीकी समस्या थी। ममता बनर्जी ने कालीघाट आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जहाँ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ कि इन पदों का अंतिम फैसला ममता बनर्जी खुद करेंगी।
- अभिषेक बनर्जी का पत्र खारिज: इसके बाद शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंद्योपाध्याय व असीमा पात्रा को उपनेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक घोषित कर महासचिव अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा भेजा गया। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने नियमों का हवाला देते हुए इसे स्वीकार करने से मना कर दिया, क्योंकि संसदीय दल के नेता का चुनाव एक औपचारिक लोकतांत्रिक बैठक में होना अनिवार्य है।
- 19 मई की बैठक में बैक-डेट सिग्नेचर का खेल: पत्र खारिज होने के बाद 19 मई को दोबारा कालीघाट में बैठक बुलाई गई। आरोप है कि यहाँ विधायकों से 6 मई की पुरानी तारीख के ‘मिनट्स’ (सदन की कार्यवाही के दस्तावेज) पर जबरन या धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए, जिसे कई विधायकों ने पकड़ लिया और विवाद थाने तक पहुंच गया।
नेताओं के घरों पर छापेमारी; अभिषेक बनर्जी को दोबारा समन
जांच को आगे बढ़ाते हुए सीआईडी की टीम अब तक नयना बंद्योपाध्याय, कुणाल घोष, तापस मैती और बहारुल इस्लाम सहित चार विधायकों के आवासों पर छापेमारी और पूछताछ कर चुकी है। इसी मामले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी सोमवार को पूछताछ के लिए तलब किया गया था, लेकिन उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर पेश होने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सीआईडी ने उन्हें अगला कड़ा नोटिस थमा दिया है।
ये भी पढ़ें – संपादकीय / जाने-क्या-कहता-है-कानून

