नई दिल्ली: देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में काम करने वाले हजारों असैन्य (Civilian) कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक राहत की खबर सामने आई है। भारत सरकार ने पूर्व के ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) के उन सभी रक्षा असैन्य कर्मचारियों के लिए उनकी सेवानिवृत्ति (Retirement) की तिथि तक ‘डीम्ड डेपुटेशन’ (Deemed Deputation) की व्यवस्था को जारी रखने को विधिक मंजूरी दे दी है, जो सात नई गठित डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में स्थायी रूप से शामिल होने (एब्ज़ॉर्प्शन) का विकल्प नहीं चुनते हैं। सरकार के इस दूरगामी फैसले को ‘एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ (EGoM) द्वारा हाल ही में अंतिम मंजूरी प्रदान की गई है।
अनिश्चितता का अंत; रक्षा मंत्रालय ने जारी किया ऑफिस मेमोरेंडम
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के महासचिव सी. श्रीकुमार के अनुसार, आयुध कारखानों के रक्षा असैन्य कर्मचारी लंबे समय से यह विधिक मांग कर रहे थे कि उन्हें नवगठित सात निगमों में शामिल होने के लिए मजबूर न किया जाए।
रक्षा मंत्रालय के ‘डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन’ (DDP) द्वारा 15 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के तहत अब इस निर्णय को कानूनी जामा पहना दिया गया है। इस क्रांतिकारी कदम से पुरानी ओएफबी के लगभग 62,000 असैन्य कर्मचारियों को लंबे समय से प्रतीक्षित स्पष्टता और मानसिक राहत मिली है। ये कर्मचारी 1 अक्टूबर 2021 को 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण (Corporatization) के बाद से ही अंतरिम रूप से ‘डीम्ड डेपुटेशन’ पर सेवाएं दे रहे थे।
शामिल होने के लिए मिलेगा ‘कॉमन एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज’; बाध्यता पूरी तरह खत्म
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कॉर्पोरेटाइजेशन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए एक द्विस्तरीय विधिक व्यवस्था तैयार की गई है:
- स्वैच्छिक विकल्प: पुरानी ओएफबी के सभी पात्र कर्मियों को सात नई रक्षा कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया एक ‘कॉमन एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज’ ऑफर किया जाएगा। कर्मचारियों के पास यह पूर्ण विधिक अधिकार होगा कि वे नई कंपनियों में स्थायी रूप से शामिल होना चाहते हैं या नहीं।
- अनिवार्यता की समाप्ति: जो कर्मचारी इस पैकेज को स्वीकार नहीं करेंगे, वे अपनी सेवानिवृत्ति तक डीपीएसयू में ‘डीम्ड डेपुटेशन’ के तहत ही कार्य करते रहेंगे। इस व्यवस्था ने नए कॉर्पोरेशन्स में जबरन या अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की हर संभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
लागू रहेंगी केंद्र सरकार की सेवा शर्तें; भत्ते और पेंशन सुरक्षित
कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जो कर्मचारी ‘डीम्ड डेप्युटेशन’ के विकल्प पर बने रहेंगे, उन पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए निर्धारित सभी नियम, विनियम और प्रशासनिक आदेश यथावत लागू रहेंगे। इसके तहत कर्मचारियों को निम्नलिखित विधिक सुरक्षा प्राप्त होगी:
- वेतनमान और भत्ते: केंद्र सरकार के तय वेतनमान, महंगाई भत्ता (DA) और अन्य वित्तीय लाभ मिलते रहेंगे।
- करियर प्रोमोशन: समयबद्ध करियर प्रगति (MACP/ Shunt) और पदोन्नति के नियम अपरिवर्तित रहेंगे।
- अन्य विधिक सुविधाएं: अवकाश, चिकित्सा सुविधाएं (CGHS/आरोग्य) और सेवा की अन्य सभी बुनियादी शर्तें केंद्र सरकार के कर्मचारी के रूप में ही सुरक्षित रहेंगी।
31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई वर्तमान अंतरिम अवधि
इस एब्ज़ॉर्प्शन और विकल्प चयन की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने के लिए, सरकार ने वर्तमान ‘डीम्ड डेप्युटेशन’ व्यवस्था की समय-सीमा जो पहले 1 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही थी, उसे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2027 कर दिया है।
कर्मचारी संगठनों, विशेष रूप से एआईडीईएफ (AIDEF) ने सरकार के इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इसे मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) में दायर रिट याचिका और कॉर्पोरेटाइजेशन को चुनौती देने वाली कानूनी कार्यवाहियों के दौरान सरकार द्वारा दिए गए विधिक आश्वासनों की तार्किक परिणति बताया है।
भविष्य की रणनीति: अनुकंपा नियुक्तियों और निगमीकरण की वापसी पर नजर
महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा कि इस फैसले ने कर्मचारी संगठनों के इस रुख को विधिक रूप से सही साबित किया है कि किसी भी केंद्रीय कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना केंद्र सरकार का दर्जा छोड़ने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत के बाद भी कर्मचारी यूनियनों का संघर्ष पूरी तरह थमा नहीं है। महासंघ ने अब सरकार से मांग की है कि सेवाकाल के दौरान जान गंवाने वाले मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी (Compassionate Appointment) देने के लंबित आदेश को भी तुरंत जारी किया जाए। इसके साथ ही, आयुध कारखानों के निगमीकरण को पूरी तरह से वापस लेने और इन्हें पुनः सरकारी विभाग के रूप में स्थापित करने की उनकी विधिक व वैचारिक लड़ाई भविष्य में भी जारी रहेगी।

