चेन्नई: तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का एक अनोखा और बिना सुरक्षा तामझाम वाला वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। अमूमन किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री या बड़े वीआईपी (VIP) नेताओं का काफिला जब सड़कों से गुजरता है, तो आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम और कड़े सुरक्षा घेरे का सामना करना पड़ता है। लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने इस स्थापित परंपरा और वीआईपी कल्चर से पूरी तरह हटकर सीधे आम जनता के बीच पहुंचने का एक क्रांतिकारी फैसला किया।
ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) से होते हुए जब वे सचिवालय (Secretariat) की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने सड़क किनारे आम लोगों की भारी भीड़ देखी और तुरंत अपनी फ्लीट को रोकने का विधिक निर्देश दिया।
नीलांगरई आवास से सचिवालय के रास्ते में लिया औचक फैसला
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय सुबह अपने नीलांगरई स्थित निजी आवास से चेन्नई में सचिवालय के लिए रवाना हुए थे। जैसे ही उनका काफिला ईसीआर रोड पर पहुंचा, उन्होंने सड़क किनारे बैरिकेड्स के पीछे अपने पसंदीदा नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों से खड़े आम नागरिकों और प्रशंसकों को देखा।
सुरक्षा प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए, उन्होंने अपनी कार को बीच रास्ते में ही रुकवा दिया। मुख्यमंत्री को अचानक कार से बाहर निकलता देख वहां तैनात सुरक्षा कर्मी और पुलिस अधिकारी भी एक पल के लिए दंग रह गए।
सुरक्षा बैरिकेड के पास जाकर लोगों से मिलाया हाथ, किया ‘फिस्ट बंप’
कार से उतरने के बाद मुख्यमंत्री विजय सीधे सड़क किनारे सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के बैरिकेड्स के पास पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं, युवाओं और बच्चों से बेहद आत्मीयता के साथ बातचीत की। मुख्यमंत्री ने न केवल लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, बल्कि बैरिकेड के ठीक पास खड़े कई उत्साही युवाओं के साथ मुस्कुराते हुए ‘फिस्ट बंप’ (Fist Bump) भी किया। उनका यह सहज और जमीन से जुड़ा अंदाज वहां मौजूद लोगों के कैमरों में कैद हो गया, जो अब इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है मुख्यमंत्री का ‘नो-VIP’ अंदाज
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेताओं से राजनेता बने मुख्यमंत्रियों का एक लंबा और ऐतिहासिक इतिहास रहा है, लेकिन सत्ता संभालने के इतने कम समय में सुरक्षा प्रोटोकॉल को किनारे रखकर जनता के बीच इस तरह सीधे संवाद स्थापित करने वाले वे हालिया दौर के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मुख्यमंत्री को ऐसा ही होना चाहिए, जो सचिवालय की बंद फाइलों से निकलकर सड़कों पर अपनी जनता का हालचाल जान सके।

