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Wednesday, June 3, 2026

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सीमा सुरक्षा पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: BSF को सौंपी 32 एकड़ जमीन; भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बनेगी पक्की बाड़

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवगठित कैबिनेट ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा (India-Bangladesh Border) की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और अवैध घुसपैठ पर पूरी तरह नकेल कसने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सीमा पर कटीली बाड़ लगाने और सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लगभग 32 एकड़ सरकारी जमीन हस्तांतरित करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने बुधवार (3 जून 2026) को हुई कैबिनेट की अहम बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जमीन आवंटन की यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण पिछले कई वर्षों से ठप पड़ी हुई थी।

9 संवेदनशील स्थानों पर लगेगी बाड़; कई जिलों में बनेंगी स्थायी चौकियां

कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि सरकार ने कई सीमावर्ती जिलों में स्थायी सीमा चौकियां (Border Outposts) बनाने और बाड़ लगाने के काम को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण के प्रस्तावों को हरी झंडी दी है। कैबिनेट की पहली ही बैठक में लिए गए नीतिगत निर्णय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बांग्लादेश सीमा से सटे नौ (9) अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर कुल 31.905 एकड़ जमीन सीधे बीएसएफ को सौंप दी गई है।

इसके अतिरिक्त, राज्य के भूमि और भूमि सुधार विभाग ने कैबिनेट के समक्ष कुछ अन्य नए प्रस्ताव भी पेश किए हैं:

  • मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार: इन तीन संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में 1.53 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित की जाएगी, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तीन नई और स्थायी सीमा चौकियां (BOPs) बनाने के लिए होगा।
  • उत्तर दिनाजपुर: इस जिले में 11 प्रमुख स्थानों पर 12.72 एकड़ जमीन देने का एक और बड़ा प्रस्ताव विचाराधीन है, जिससे सीमा पर फेंसिंग (बाड़) के अधूरे काम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।

कलकत्ता हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद जागी सरकार

गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का यह मुद्दा राज्य की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से लंबे समय से भारी विवादों और कानूनी दांवपेंचों में उलझा हुआ था। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने जैसे अति-संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दे पर जमीन हस्तांतरण में हो रही अत्यधिक देरी और हीलाहवाली को लेकर राज्य की पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की बेहद कड़ी आलोचना की थी। वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही इस कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

सेवक-रंगपो रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के लिए भी 20 एकड़ जमीन का रास्ता साफ

बॉर्डर फेंसिंग के अलावा, बुधवार को हुई इस कैबिनेट बैठक में राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में स्थित 20 एकड़ सरकारी भूमि को तत्काल प्रभाव से वन विभाग (Forest Department) को हस्तांतरित किया जाएगा। वन विभाग इस रणनीतिक भूमि को पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी ‘सेवक-रंगपो रेलवे लाइन प्रोजेक्ट’ (Sevak-Rangpo Railway Line Project) के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे को सौंप देगा। इस प्रकार सरकार ने एक ही बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सुदूर रेल संपर्क परियोजना के विकास का मार्ग भी पूरी तरह प्रशस्त कर दिया है।

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