कोलकाता: पश्चिम बंगाल में माओवादी नेटवर्क को एक और बड़ा झटका देते हुए ₹10 लाख की इनामी हार्डकोर महिला माओवादी नेता शकुंतला महतो ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया है। बुधवार को कोलकाता पुलिस के केंद्रीय मुख्यालय लालबाजार में उसने आधिकारिक तौर पर अपने अत्याधुनिक हथियार और 46 जिंदा कारतूस सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिए।
कोलकाता के पुलिस आयुक्त (CP) अजय कुमार नंद ने इस विधिक आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए बताया कि शकुंतला महतो उर्फ ‘पुष्पा’, ‘परी’ और ‘बर्षा’ प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की अत्यंत प्रभावशाली जोनल कमेटी की सदस्य थी और पिछले दो दशकों से अधिक समय से भूमिगत रहकर देश विरोधी गतिविधियों में सक्रिय थी।
तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बनी थी ‘पुष्पा’
लालबाजार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शकुंतला महतो का आत्मसमर्पण करना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जंगलमहाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में अब माओवादी आंदोलन और उनकी हिंसक गतिविधियां पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी हैं।
- सक्रियता का क्षेत्र: शकुंतला महतो केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ट्राई-जंक्शन (सीमावर्ती इलाकों) में संगठन का नेतृत्व कर रही थी।
- रणनीतिकार: वह सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए जाने वाले कई बड़े हमलों, आईईडी (IED) ब्लास्ट और हिंसक ऑपरेशनों की मुख्य मास्टरमाइंड और योजनाकार (Planner) रही थी।
“अब हिंसक विचारधारा पर भरोसा नहीं, जीना चाहती हूं सामान्य जीवन”
आत्मसमर्पण के बाद शकुंतला महतो ने मीडिया के सामने संगठन के भीतर की विसंगतियों को उजागर किया। उसने कहा, “अब मुझे इस खोखली हिंसक विचारधारा और आंदोलन पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है। मैं अपनी जिंदगी के बचे हुए साल अपने परिवार के साथ एक आम नागरिक की तरह शांति से जीना चाहती हूं।” उसने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) के तहत रहने के लिए घर और रोजगार की उम्मीद जताई है।
सांस्कृतिक विंग से बनकर उभरी थी हथियारबंद कमांडर; साथियों से की यह अपील
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के जनजातीय बहुल जिले झारग्राम (Jhargram) की रहने वाली शकुंतला महतो वर्ष 2001 में माओवादी संगठन के संपर्क में आई थी।
- शुरुआती दौर: संगठन में शामिल होने के बाद शुरुआती दिनों में वह माओवादियों के सांस्कृतिक संगठन और प्रचार-प्रसार विंग से जुड़ी रही।
- हथियारबंद विंग: उसकी आक्रामक कार्यशैली को देखते हुए बाद में उसे मिलिट्री विंग में शामिल कर हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई, जिसके बाद वह जोनल कमांडर के पद तक पहुंची।
सदन में मुख्यधारा में लौटने के बाद शकुंतला ने जंगलों में छिपे अपने बाकी माओवादी साथियों और कैडरों से भी भावुक अपील की। उसने कहा कि हथियार उठाने से केवल विनाश होता है, इसलिए सभी को हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार द्वारा दी जा रही विकास की मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए।
कमजोर पड़ रहा है संगठन; सरकारी नीति के तहत होगा पुनर्वास
कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में खुफिया इनपुट्स के आधार पर की गई कड़ाई के कारण कई शीर्ष माओवादी या तो सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं या वे लगातार आत्मसमर्पण कर रहे हैं। इससे संगठन की लॉजिस्टिक्स और जनबल की ताकत पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शकुंतला महतो के खिलाफ दर्ज लंबित मामलों की विधिक समीक्षा की जाएगी और सरकार की सरेंडर नीति के अनुसार उसके सुरक्षित पुनर्वास और वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

