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Saturday, June 20, 2026

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₹600 करोड़ के फंड पर टीएमसी में आर-पार: बागी विधायकों ने साइबर सेल में की शिकायत; बैंक खातों की FIR और लेन-देन पर रोक की मांग

कोलकाता/बिधाननगर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही आंतरिक कलह अब सीधे पुलिस थाने की चौखट तक पहुंच गई है। पार्टी के बागी विधायकों ने टीएमसी के आधिकारिक और कॉर्पोरेट फंड पर सीधा हमला बोलते हुए बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम विंग में एक औपचारिक विधिक शिकायत दर्ज कराई है।

बागी विधायकों ने पुलिस से इस मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने और पार्टी से जुड़े तीन विशिष्ट बैंक खातों के डिजिटल लेन-देन की गहन जांच करने की मांग की है। यह पूरा विवाद एक निजी बैंक के लॉकरों और खातों में जमा ₹600 करोड़ से अधिक के फंड के विधिक स्वामित्व और स्रोत से जुड़ा हुआ है।

फंड के स्रोत पर गंभीर सवाल; अरूप बिस्वास भी जता चुके हैं आपत्ति

बागी विधायकों ने उक्त निजी बैंक खातों में जमा इतनी भारी-भरकम राशि के विधिक स्रोत (Source of Fund) और उसके संदिग्ध इस्तेमाल पर गंभीर उंगलियां उठाई हैं। यह वित्तीय विवाद पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी के भीतर जारी सत्ता संघर्ष के केंद्र में है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही ममता बनर्जी के वफादार और वरिष्ठ टीएमसी नेता अरूप बिस्वास ने भी इन खातों के प्रबंधन और विधिक नियंत्रण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी और बैंक प्रबंधन से इन खातों के संचालन पर अंतरिम रोक (Freeze) लगाने की मांग की थी। अब बागी गुट ने इस मामले को सीधे आपराधिक और फॉरेंसिक जांच के दायरे में लाकर विवाद को और बड़ा रूप दे दिया है।

‘कट-मनी’ और संस्थागत भ्रष्टाचार का विधिक अंदेशा
पुलिस को सौंपी गई शिकायत पत्र की प्रति के अनुसार, बागी विधायकों ने मुख्य रूप से तीन बैंक खातों के संपूर्ण वित्तीय इतिहास (Transaction History) की विधिक ऑडिट की मांग की है:

  • अवैध हेराफेरी का शक: विधायकों को प्राथमिक अंदेशा है कि इस फंड में जमा पैसा वैध कॉर्पोरेट डोनेशन का नहीं, बल्कि राज्य में कथित तौर पर चली ‘कट-मनी’ व्यवस्था, सरकारी धन के डायवर्जन या किसी बड़े वित्तीय घोटाले का हिस्सा है।
  • डिजिटल फ्रॉड की आशंका: विधिक शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि अपने ऊंचे राजनैतिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके बेईमानी से जुटाए गए इस काले धन को ठिकाने लगाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन बैंकिंग (Cyber Infrastructure) का सहारा लिया गया है।

चार्टर्ड फ्लाइट और शीर्ष नेतृत्व के दिल्ली दौरे पर सीधा निशाना

बागी गुट का नेतृत्व कर रहे टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इस विधिक कदम की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि 10 से अधिक मौजूदा विधायकों ने इस संयुक्त शिकायत पत्र पर हस्ताक्षर कर पुलिस से संपर्क किया है।

  1. संस्थागत जबरन वसूली: ऋतब्रत बनर्जी ने कड़ा आरोप लगाया कि खातों में जमा यह अरबों रुपया संस्थागत भ्रष्टाचार और जबरन वसूली से जुड़ा हो सकता है, जिसकी विस्तृत विधिक जांच केवल विशेषज्ञ एजेंसियां ही कर सकती हैं।
  2. चार्टर्ड फ्लाइट्स का मुद्दा: बागी गुट ने कोलकाता और दिल्ली के बीच हाल के दिनों में संचालित हुई वीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स (Chartered Flights) के खर्चों पर भी बड़े सवाल दागे। उनका सीधा इशारा पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी की हालिया दिल्ली यात्राओं की तरफ था।

बागी विधायकों ने विधिक मांग की है कि जब तक पुलिस साइबर सेल और वित्तीय विशेषज्ञ इन खातों के लेन-देन के पीछे छिपे पूरे सच को सामने नहीं लाते, तब तक इन तीनों बैंक खातों से होने वाले हर तरह के विधिक व डिजिटल लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। इस कदम के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर का गुटीय संघर्ष अब एक गंभीर कानूनी और वित्तीय जांच के भंवर में फंसता नजर आ रहा है।

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