पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में 4 और 5 मई 2026 की तारीखें एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गई हैं। यहाँ चुनाव से जुड़ी सभी प्रमुख खबरें विस्तृत और बिना किसी रुकावट के दी गई हैं:
भाजपा की ऐतिहासिक प्रचंड जीत और ममता बनर्जी की विदाई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम नतीजों ने 15 साल के तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन का अंत कर दिया है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी मात्र 81 सीटों पर सिमट गई है। यह पहली बार है जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। इस चुनाव में राज्य ने 92.93% मतदान का एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बनाया।
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भवानीपुर में बड़ा उलटफेर: ममता बनर्जी की हार
इस चुनाव का सबसे बड़ा चौंकाने वाला परिणाम कोलकाता की भवानीपुर सीट से आया, जहाँ भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हरा दिया। ममता बनर्जी ने मतगणना के बीच ही केंद्र छोड़ दिया था। शुभेंदु अधिकारी ने न केवल अपनी सीट बचाई बल्कि राज्य में ‘जायंट स्लेयर’ के रूप में उभरे। अपनी हार के बाद ममता बनर्जी ने इसे ‘लोकतंत्र की लूट’ बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के पक्ष में काम किया है।
पीएम मोदी का विजय उद्घोष: ‘गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल’
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय उत्सव को संबोधित किया। बंगाली पोशाक में नजर आए पीएम ने इस जीत को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों की पूर्ति बताया। उन्होंने बंगाल की जनता को ‘भयमुक्त’ होने की बधाई दी और वादा किया कि पहली ही कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा और घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पीएम ने इसे प्रदर्शन की राजनीति और गुड गवर्नेंस की जीत करार दिया।
अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बदला समीकरण
115 मुस्लिम बहुल सीटों (जहाँ 30% से अधिक आबादी है) पर टीएमसी ने 69 सीटें जीतकर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन भाजपा ने इन क्षेत्रों में सेंध लगाते हुए 39 सीटों पर जीत हासिल की। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में, जो कभी कांग्रेस और टीएमसी के गढ़ थे, भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई है, जबकि वामपंथियों (CPM) को मात्र 1 सीट मिली है।
शांतिपूर्ण मतदान में सुरक्षा बलों की भूमिका
इस बार के चुनाव की एक और बड़ी खबर ‘हिंसा मुक्त मतदान’ रही। सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह और एसडीजी वितुल कुमार के नेतृत्व में 2.40 लाख केंद्रीय सुरक्षा बलों ने ‘वन इलेक्शन फोर्स’ के रूप में कार्य किया। 4000 से अधिक क्विक रिस्पांस टीमों (QRT) और बख्तरबंद वाहनों की तैनाती के कारण उपद्रवी घरों से बाहर नहीं निकल सके, जिससे बंगाल के मतदाताओं में विश्वास पैदा हुआ और रिकॉर्ड मतदान हुआ।
मुख्यमंत्री की रेस में कौन आगे?
भाजपा की भारी जीत के बाद अब सबकी नजरें अगले मुख्यमंत्री पर हैं। हालांकि पार्टी ने पहले कोई चेहरा घोषित नहीं किया था, लेकिन भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। अन्य संभावित नामों में प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संसदीय दल की बैठक के बाद जल्द ही नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
दक्षिण भारत और अन्य राज्यों का हाल
बंगाल के साथ-साथ अन्य राज्यों के नतीजों ने भी चौंकाया है। तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK 107 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। केरल में यूडीएफ (कांग्रेस गठबंधन) ने एलडीएफ को हराकर सत्ता में वापसी की है, जबकि असम में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाई है। पुदुचेरी में भी एनडीए गठबंधन फिर से सत्ता में वापसी कर रहा है।

