तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की 50 साल पुरानी राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए द्रविड़ मुनेंद्र कड़गम (DMK) और AIADMK के दबदबे को खत्म कर दिया है। इस सफलता के साथ ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का एक साल पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है।
प्रशांत किशोर की सटीक भविष्यवाणी आज से करीब एक साल पहले प्रशांत किशोर ने एक टीवी इंटरव्यू में बड़ी भविष्यवाणी की थी:
- अकेले लड़ने की सलाह: पीके ने कहा था कि यदि विजय गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ते हैं, तो वे बहुमत हासिल कर सकते हैं।
- वीडियो सेव करने की चुनौती: उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा था, “इस वीडियो को सेव कर लीजिए और नतीजे वाले दिन इसे चलाइएगा।”
- बहुमत का अनुमान: जब उनसे 118 सीटों (बहुमत का आंकड़ा) के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने ‘हां’ में जवाब दिया था। वर्तमान रुझानों और नतीजों में TVK इस आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गई है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: ताजा आंकड़े (कुल 234 सीटें)
| पार्टी | सीटें (जीती/बढ़त) | स्थिति |
|---|---|---|
| TVK (विजय) | 107 | सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी |
| DMK (एम.के. स्टालिन) | 60 | भारी नुकसान, स्टालिन कोल्थूर सीट हारे |
| AIADMK (ईपीएस) | 47 | तीसरे स्थान पर खिसकी |
| कांग्रेस | 05 | सीमित प्रभाव |
| भाजपा | 01 | खाता खुला |
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टीवीके की जीत के बड़े मायने
- द्रविड़ राजनीति में बदलाव: पिछले 50 वर्षों से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच घूमती रही थी। विजय की जीत ने इस द्विध्रुवीय राजनीति को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है।
- मल्टी-पोलर चुनाव: प्रशांत किशोर ने पहले ही भांप लिया था कि जनता अब पारंपरिक विरासत वाली पार्टियों से परे एक ताजा विकल्प की तलाश में है।
- स्टालिन की हार: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का अपने गढ़ कोल्थूर से हारना टीवीके की ‘लहर’ का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
विजय की रणनीतिक जीत विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान ‘8 ग्राम मुफ्त सोना’ और जन-कल्याणकारी योजनाओं के साथ ‘द्रविड़ किला’ फतह करने का रोडमैप तैयार किया था। उन्होंने ड्राइवर के बेटे जैसे आम कार्यकर्ताओं को टिकट देकर ‘जमीनी राजनीति’ का संदेश दिया, जिसका असर नतीजों में साफ दिख रहा है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय अकेले दम पर सरकार बनाएंगे या अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर ‘सत्ता के कांटों भरे ताज’ को स्वीकार करेंगे।

