नई दिल्ली, 3 मई 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार किए जाने के फैसले का जोरदार स्वागत किया है। दिल्ली हवाई अड्डे पर समर्थकों के बीच पहुंचे खेड़ा ने इसे संविधान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत करार दिया।
1. क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ की गई एक कथित टिप्पणी से जुड़ा है।
- प्राथमिकी (FIR): इस टिप्पणी को लेकर असम में पवन खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
- हाई कोर्ट का रुख: इससे पहले गौहाटी उच्च न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा (Interim Protection) देने से इनकार कर दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: 1 मई को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए खेड़ा की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
2. सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच की प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया:
- अनुच्छेद 21 का हवाला: पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिली ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ को हल्के में खतरे में नहीं डाला जा सकता।
- जांच बनाम गिरफ्तारी: अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि जांच ईमानदारी से होनी चाहिए, लेकिन गिरफ्तारी को अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए।
3. जमानत की शर्तें
शीर्ष अदालत ने पवन खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ राहत दी है:
- सहयोग: उन्हें जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर पेश होना होगा।
- साक्ष्य सुरक्षा: वे गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे।
- विदेश यात्रा: सक्षम अदालत की अनुमति के बिना वे भारत छोड़कर नहीं जा सकेंगे।
4. पवन खेड़ा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
- पवन खेड़ा: “डॉ. बी.आर. अंबेडकर का बनाया संविधान दमनकारी सरकारों के खिलाफ लड़ने वालों की रक्षा करता है। मुझे मिली राहत इसी संविधान की ताकत का प्रमाण है।”
- अभिषेक मनु सिंघवी: कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि मानहानि जैसे मामलों में ‘ट्रिपल टेस्ट’ (भागने का जोखिम, गवाहों या सबूतों को प्रभावित करना) के बिना गिरफ्तारी अनुचित है।
- जयराम रमेश: उन्होंने कहा कि यह फैसला देश की न्यायपालिका में उनके विश्वास को और मजबूत करता है।

