नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार (20 जून 2026) को भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास और उसकी गौरवमयी विधिक व सामाजिक संरचना को रेखांकित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल (Indian Armed Forces) केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि वे हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता के सबसे बड़े जीवंत प्रतीकों में से एक हैं।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारतीय सेना के भीतर देश की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता (Diversity) को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है, जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि, भाषाओं और क्षेत्रों से आने वाले वीर सैनिक एक ही संकल्प के साथ एकजुट होकर राष्ट्र की सेवा करते हैं।
“सेना की सर्व-समावेशी भावना देश को बनाती है अभेद्य”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा: “भारतीय सेना की सबसे बड़ी विधिक और नैतिक ताकत उसकी सर्व-समावेशी संस्कृति है। यहां जाति, पंथ या क्षेत्र के आधार पर नहीं, बल्कि केवल योग्यता और राष्ट्रप्रेम के आधार पर सैनिक कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। विविधता के बीच एकता की यही अप्रतिम भावना देश की संप्रभुता को हर प्रकार के आंतरिक और बाहरी खतरों से सुरक्षित व मजबूत बनाती है।”
विविधता और राष्ट्र सेवा का विधिक ढांचा
रक्षा मंत्री के इस बयान को भारतीय सेना के उस स्थापित विधिक और प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में देखा जा रहा है, जो धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद की बुनियाद पर टिका है:
- समान अवसर: भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती की विधिक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और देश के हर नागरिक को समान अवसर प्रदान करती है।
- एकता का संदेश: विभिन्न रेजीमेंटों का इतिहास और उनका आपसी समन्वय यह साबित करता है कि विविधता ही भारत की असली विधिक ताकत है।
सशस्त्र बलों का यह चरित्र न केवल हमारे देश के संवैधानिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि दुनिया भर के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत करता है कि कैसे एक विविध समाज सामूहिक राष्ट्र रक्षा के लिए एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

