बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अंदरूनी गलियारों में भूचाल आ गया है। चुनाव में हुई क्रॉस-वोटिंग (Cross-Voting) की घटना पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने एक बेहद चौंकाने वाला विधिक व राजनीतिक खुलासा किया है। सोमवार (22 जून 2026) को पत्रकारों से बातचीत में गौड़ा ने दावा किया कि उन्होंने मतदान से पहले ही भाजपा संगठन को संभावित गड़बड़ी और भीतरघात के प्रति विधिक रूप से आगाह कर दिया था।
1. लग्जरी टावर में हुई थी संदिग्ध बैठक: सदानंद गौड़ा
पूर्व केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने बताया कि चुनाव से ठीक पहले उन्हें इस विधिक धांधली की भनक लग चुकी थी:
- गुप्त सूचना: 13 जून की शाम उनके एक बेहद करीबी और गैर-राजनीतिक व्यक्ति (जो पीएम नरेंद्र मोदी का समर्थक है) ने उन्हें फोन पर एक गोपनीय जानकारी दी। बेंगलुरु शहर के एक लग्जरी टावर में कुछ भाजपा नेताओं और विपक्षी दल के लोगों के बीच विधान परिषद चुनाव को प्रभावित करने के लिए एक गुप्त बैठक हुई थी।
- नेताओं से नहीं हो पाया संपर्क: सूचना मिलते ही गौड़ा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन दोनों से बात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने विधिक व संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाते हुए पार्टी के एक राज्य महासचिव को पूरे मामले की जानकारी देकर सतर्क रहने को कहा था।
- डीके शिवकुमार की प्रतिष्ठा का दांव: गौड़ा ने महासचिव से स्पष्ट कहा था कि उपमुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार के लिए यह पहली बड़ी राजनीतिक और विधिक परीक्षा है, और वे इसे जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
2. MLC चुनाव का विधिक व गणितीय समीकरण: भाजपा को लगा बड़ा झटका
पिछले सप्ताह संपन्न हुए कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों के चुनाव नतीजों ने भाजपा-जेडीएस (NDA) गठबंधन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वोटों के विधिक विश्लेषण से साफ है कि बड़े पैमाने पर क्रॉस-वोटिंग हुई है:
| पार्टी / गठबंधन | अनुमानित/वैध विधायक वोट | चुनाव में मिले कुल वोट | परिणाम (जीती गई सीटें) |
| कांग्रेस (Congress) | ~140 | 151 (+11 अतिरिक्त वोट) | 05 सीटें (भव्य जीत) |
| भाजपा (BJP) | – | निर्धारित वोट से कम | 02 सीटें |
| जनता दल (सेक्युलर) | – | न्यूनतम कोटा भी नहीं मिला | 00 seat (शून्य) |
“पैसों के लिए पार्टी से गद्दारी की गई”
सदानंद गौड़ा ने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि चुनाव परिणाम देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने सीधा विधिक आरोप लगाया कि क्रॉस-वोटिंग करने वाले जनप्रतिनिधियों ने पैसों के लिए खुद को बेच दिया और पार्टी की साख को विधिक नुकसान पहुँचाया है। जनता न सिर्फ बिकने वाले विधायकों से नाराज है, बल्कि उन शीर्ष नेताओं से भी खफा है जो अपनी विधिक व संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने दोषियों की पहचान कर उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की विधिक मांग की है।
3. ‘धर्मस्थल’ में भगवान के सामने शपथ दिलाने के विचार पर कड़ा विधिक विरोध
क्रॉस-वोटिंग की सच्चाई का पता लगाने और संदिग्ध विधायकों का ‘लाई-डिटेक्टर टेस्ट’ करने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने एक अनोखा सुझाव दिया था। उन्होंने प्रस्ताव रखा था कि सभी विधायकों को प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ‘धर्मस्थल’ ले जाया जाए और वहाँ भगवान मंजूनाथ के सामने कसम खिलवाई जाए कि उन्होंने पार्टी से गद्दारी नहीं की।
सदानंद गौड़ा ने इस विचार को विधिक और नैतिक रूप से पूरी तरह गलत बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा:
“मैंने विजयेंद्र और आर. अशोक दोनों के सामने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी पवित्र धार्मिक स्थल या ईश्वर की चौखट का इस्तेमाल राजनीतिक गंदे खेल और विधिक विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह हमारी संस्कृति और मतदाताओं के विश्वास के खिलाफ है।”
आगे की राह: गौड़ा के इस विस्फोटक बयान के बाद अब कर्नाटक भाजपा के भीतर जवाबदेही को लेकर आंतरिक कलह और तेज होने की संभावना है। केंद्रीय नेतृत्व भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है कि आखिर किन विधायकों ने पाला बदला और राज्य संगठन के कौन से पदाधिकारी इस विधिक विफलता के लिए जिम्मेदार हैं।

